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महंगाई, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी पर किए व्यंग्य

7 वर्ष पहले
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इधर, मेले में स्कूली बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किए

डोलमेला रंगमंच पर शनिवार की रात को राजस्थानी कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें आए कवियों ने भ्रष्टाचार, महंगाई, बेरोजगारी, सांप्रदायिकता आदि पर तीखे व्यंग्य किए। कवियों ने ठेठ राजस्थानी भाषा में रचनाओं की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को रोमांचित कर दिया।

मंच पर कवि गौरस प्रचंड ने वे मौज मार्या शासन में..., कविता सुनाई तो हर कोई वाहवाही कर उठा। अंदाज हाड़ौती ने बुरा मानो..., बद्री बसंत ने राजस्थान की धरती का यशोगान किया। भूपेंद्र राठौड़ ने सरकार थारी योजना.., सहित वीर रस की कविताएं सुनाई। गोविंद हाकला ने हास्य व्यग्यं से श्रोताओं को ओत-प्रोत कर दिया। कवि राजकुमार बादल ने भ्रष्टाचार और बेरोजगारी पर कटाक्ष किए। दिनेश दिव्य ने हांस्य व्यंग्य, पीयूष शर्मा ने नेता का बेटा..., एवं गिर्राज आमेठा ने तू कुण छ: बैरन..., कविता के माध्यम से भ्रष्टाचार महंगाई को लेकर पीड़ा बताई। वहीं मुरलीधर गौड़ ने सत्ता पलट कर दी, कांदा ने गजब कर दी..., कविता सुनाकर श्रोताओं को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। वहीं कवि दुर्गादान सिंह ने अरी तन देख देख म्हू जील्यू, जाणा चांद चूलू म्हू पील्यू..., से वातावरण को प्रेम भावना की मिठास से डुबो दिया। इसके बाद मीठा गीत जवानी मीठी मीठा ढोला-मारु..., कविता सुनाई। मुकुटमणिराज ने श्रृंगार रस की कविताएं सुनाई। उन्होंने यू खेले मत छिना पताई...,की प्रस्तुति देकर श्रोताओ का मन मोह लिया। संचालन कवि राजेंद्र पंवार ने किया।

सीसवाली. तेजा मेले के मुख्यमंच पर सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करती स्कूली छात्राएं।

बारां. कवि सम्मेलन सुनने के लिए आए श्रोता।

बारां. डोल मेला रंगमंच पर राजस्थानी कवि सम्मेलन हुआ।