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जयपुर में निजी फर्म से आरटीडीसी की एकाउंटिंग, अपने कर्मियों को हटाया

5 वर्ष पहले
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राजस्थानपर्यटन विकास निगम लिमिटेड (आरटीडीसी) को घाटे से उबारने के नाम पर अजब गजब फैसले लिए जा रहे हैं। निगम प्रबंधन ने अपने एकाउंट्स विंग के कर्मियों को तो दूसरे विभागों में भेज दिया और अब निजी फर्म को अकाउंट्स का काम देने की तैयारी है। इसके लिए टेंडर जारी कर दिया गया है। आरटीडीसी को घाटे से उबारने के नाम पर एकाउंट्स विंग के 83 में से 53 कर्मचारियों को दूसरे विभागों में प्रतिनियुक्ति पर भेज दिया गया। ये कर्मचारी एकाउंट्स और टैक्स का काम देख रहे थे। अब कर्मचारियों की कमी बताकर आरटीडीसी के पूरे एकाउंट्स सिस्टम को ही निजी फर्मों को देेने की तैयारी है।

टेंडरसे पहले ही ले लिया कोटेशन : आरटीडीसीप्रबंधन की पारदर्शी व्यवस्था पर अभी से सवाल इस लिए खड़ा हो रहा है कि टेंडर जारी होने से पहले ही चार फर्म के कोटेशन मंगाए गए। इनमें प्रमोद गोयल एसोसिएट्स, विकास केसी बंसल एसोसिएट्स, वीपीडी कंपनी और जीडी एंड कंपनी शामिल है, जिनसे अलग-अलग होटलों के लिए प्रतिमाह का एकाउंट्स मेंटेन कराने के लिए कोटेशन लिया गया है।

पकड़ाथा 14 करोड़ का चेक बाउंस का मामला : एकसाल पहले आरटीडीसी में 14 करोड़ रुपये का चेक बाउंस का घपला पकड़ा गया था। निजी फर्म की ओर से इसका आडिट किया गया, लेकिन कोई गड़बड़ी नहीं पाई गई। आरटीडीसी के कर्मचारियों ने ही इसका खुलासा किया था, लेकिन आरटीडीसी प्रबंधन ने जानबूझ कर आज तक दोषी अफसरों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की।

^निजीफर्म से एकाउंट्स सेवाएं लेने के लिए आदेश जरूर जारी किया गया है, लेकिन इसके बारे में कुछ भी कहना संभव नहीं है। - एमएलगुप्ता, कार्यकारी निदेशक वित्त राजस्थान पर्यटन विकास निगम

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