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म्यूजियम में सजेगी आदिम जनजाति संस्कृति

5 वर्ष पहले
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बारां. शहर की पुरानी सिविल लाइन स्थित म्यूजियम में सहरिया संस्कृति से संबंधित आर्ट गेलरी भी लगाई जाएगी।

बारां| शहरमें पुरानी सिविल लाइन स्थित नवनिर्मित म्यूजियम में पुरातत्व धरोहर के साथ सहरिया संस्कृति से जुड़ी सामग्री आर्ट गैलरी में सजाई जाएगी। करीब 60 लाख रुपए की लागत से म्यूजियम को सिविल वर्क पूरा हो चुका है। इसमें पुरामहत्व की वस्तुएं संग्रहित करने का काम प्रारंभ कर दिया गया है। यह प्रक्रिया पूरी होने पर म्यूजियम को आमजन के अवलोकन के लिए खोला जाएगा।

शहर में पुरानी सिविल लाइन में साल 2012 में 60 लाख रुपए की लागत से म्यूजियम का निर्माण प्रारंभ किया गया था। बजट की कमी के चलते बीच में इसका काम कुछ समय के लिए अटका रहा। हाल ही में म्यूजियम का सिविल वर्क फाइनल हो चुका है। इसमें प्राचीन, सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजने के लिए शो-केस लगाए गए हैं। इनमें जिले का इतिहास, प्राचीन प्रतिमाएं, अस्त्र-शस्त्र, कलाकृतियां आदि रखी जाएंगी। खास बात यह है कि जिले की सहरिया आदिम संस्कृति से संबंधित सामग्री, कलाकृतियों आदि को भी म्यूजियम में प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा।

शाहाबादका किया था दौरा

पिछलेदिनों पुरातत्व विभाग की ओर से सहरिया आदिम जनजाति बहुल शाहाबाद का दौरा किया गया था। इसमें सहरिया परियोजना से भी आदिम जनजाति से संबंधित तथ्य एकत्रित किए गए। शाहाबाद एडीएम रामप्रसाद मीणा ने बताया कि पुरातत्व विभाग की टीम को सहरिया जनजाति से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां दी गई है। म्यूजियम में सहरिया संस्कृति प्रदर्शित होना अच्छा रहेगा।

केमिकलट्रीटमेंट होगा

पुरामहत्वकी प्रतिमाओं को म्यूजियम के एक कमरे में संरक्षित करके रखा गया है। इनका विशेषज्ञ केमिकल ट्रीटमेंट करेंगे। इसके लिए प्रतिमाओं को चिंहित किया जा रहा है। साथ ही कोटा झालावाड़ के म्यूजियम से अस्त्र-शस्त्र भी मंगवाए जाएंगे। साथ ही जिले से संबंधित पुरा महत्व की सामग्री को बारां लाया जाएगा। इसकी भी विभागीय स्तर पर तैयारी की जा रही है।

^बारांम्यूजियम में प्राचीन पुरामहत्व की वस्तुओं को रखने की प्रक्रिया की जा रही है। इसमें सहरिया आदिम जनजाति से संबंधित सामग्री, कलाकृति सांस्कृतिक विविधता को प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा। म्यूजियम में जल्द ही कार्य पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। -उमराव सिंह, अधीक्षक, पुरातत्व विभाग, कोटा

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