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मलेरिया की चपेट में मासूम अस्पताल में रोज बढ़ रहे रोगी
मौसममें दिनोदिन रहा बदलाव बीमारियों का कारण बनता जा रहा है। मलेरिया बुखार की चपेट में आने से छोटे बच्चों में खून की कमी रही है। जिला अस्पताल में बाल एवं शिशु वार्ड में हालत यह है कि एक ही बैड पर दो से तीन बच्चों को भर्ती करना पड़ रहा है। इसके चलते ब्लड बैंक से खून का ट्रांजक्शन (लेन-देन) बढ़ गया है।
अस्पतालों के आउटडोर में मरीजों तीमारदारों की भीड़ बढ़ रही है। आउटडोर से लेकर जांच केंद्र, ब्लड बैंक, निशुल्क दवा काउंटर से लेकर इनडोर में मरीजों की संख्या अधिक है। शिशु एवं बाल रोग वार्ड में लगे 24 बैड के स्थान पर दोगुने तक बीमार बच्चे पहुंच रहे हैं। इनको भर्ती करने के लिए जगह की कमी होने से एक बैड पर दो से तीन बच्चों को भर्ती किया जा रहा है। वहीं मलेरिया की गिरफ्त में आए मासूमों में खून की कमी हो रही है। स्थिति यह है कि हर समय दो से तीन बच्चे ब्लड चढ़वाने के लिए अस्पताल के वार्ड में भर्ती रहते हैं।
पहलेबढ़ा फिर घटा मलेरिया
चिकित्साविभाग के अनुसार पिछले सप्ताह जिले में मलेरिया पीड़ितों की संख्या 412 तक पहुंच गई थी। बीते सप्ताह इनकी संख्या घटकर 297 रह गई है। इस सप्ताह की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। सहरोद निवासी त्रिलोकचंद शर्मा ने बताया कि उनके 12 वर्षीय बेटे सनी को मलेरिया पॉजिटिव होने पर जिला अस्पताल स्थित बाल एवं शिशु रोग वार्ड में भर्ती किया गया है।
बच्चेको बुखार से आई खून की कमी
केलवाड़ानिवासी माखन सिंह के डेढ़ वर्षीय बेटे दक्षु को पहले कुछ दिन तक बुखार रहा। इसके बाद तबीयत बिगड़ती चली गई। दक्षु को गुरुवार को जिला अस्पताल में लाकर भर्ती करवाया गया है। इसके दो यूनिट खून चढ़ चुका है। पीलिया गांव निवासी गुरुदयाल गोस्वामी के 10 माह के बेटे आर्यन को खांसी, जुकाम के बाद बुखार की शिकायत हुई। आर्यन को जिला अस्पताल में दिखाया गया, तो डॉक्टरों ने खून की कमी बताई है। उसे शुक्रवार को एक यूनिट खून चढ़ाया गया।
बीपॉजिटिव की कमी
ब्लडबैंक प्रभारी डॉ. सुमित परूथी ने बताया कि इन दिनों रोजाना 40 से 50 यूनिट ब्लड का ट्रांजक्शन (लेन-देन) हो रहा है। सामान्य दिनों के मुकाबले यह अधिक है। ब्लड बैंक में बी पॉजिटिव श्रेणी के खून की कमी है। मरीजों के तीमारदारों को रिप्लेसमेंट में ब्लड उपलब्ध करवाया जा रहा है। बी पॉजिटिव वाले रक्तदाता स्वैच्छिक रक्तदान कर कमी हो पूरा कर