स्टाफ का पहले से टोटा, एमसीएच यूनिट और बीमार कर देगी जिला अस्पताल को
जिला अस्पताल में पहले से डाॅक्टरों अन्य स्टाफ की कमी चल रही है। ऐसे में नई यूनिट को भी पुराने स्टाफ के भरोसे शुरू करवाने की तैयारी की जा रही है। अगर चिकित्सा विभाग की ओर से ऐसा किया जाता है तो स्थिति और बिगड़ सकती है, क्योंकि जिला अस्पताल में जिलेभर से आने वाले मरीजों की संख्या को संभालना ही भारी पड़ रहा है। आए दिन मरीजों डाॅक्टराें के बीच विवाद होते रहते हैं।
राज्य सरकार की ओर से जिला अस्पताल में 17 करोड़ की लागत से बनाए गए 100 बेड के मातृ एवं शिशु अस्पताल (एमसीएच यूनिट) का निर्माण करवाया गया था, लेकिन एक साल गुजरने के बाद भी इस भवन में एमसीएच यूनिट का संचालन शुरू नहीं हो सका है।
यहां फिलहाल ओपीडी ब्लाॅक का संचालन किया जा रहा है। हाल ही में राज्य सरकार के निर्देशों के बाद विभाग इसमें एमसीएच यूनिट शुरू करने की तैयारी कर रहा है। इसके शुरू होने से जिलेभर के लोगाें को लाभ मिलेेगा। वहीं दूसरी ओर जिला अस्पताल में पहले से ही विशेषज्ञ डाॅक्टरों की कमी है। डाॅक्टर अन्य स्टाॅफ नहीं होने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। एमसीएच यूनिट को चालू कराने के चिकित्सा विभाग एक साल से स्टाफ का इंतजार कर रहा है, लेकिन तो एक साल में यहां डाॅक्टरों की संख्या बढ़ी और ही अलग से स्टाफ लगाया गया। ऐसे में चिकित्सा विभाग की ओर से मजबूरी में पुराने स्टाफ के भरोसे ही नई यूनिट का संचालन करने की तैयारी की जा रही है। इसके चलते जिला अस्पताल में सुविधा बढ़ने के साथ लोगों को परेशानियों का भी सामना करना पड़ेगा।
एमसीएच यूनिट को चालू करने के लिए कम से कम आधा दर्जन डाॅक्टरों सहित नर्सिंग स्टाफ, वार्ड ब्वाय, सुरक्षा गार्ड, स्वीपर आदि के पद भी भरने होंगे। इन सब रिक्त पदों को भरने की जिम्मेदारी प्रशासन स्तर से होनी है, लेकिन स्टाफ को लेकर अभी तक कोई कवायद शुरू नहीं हुई है।
यूनिट के लिए अब तक स्टाफ की नहीं है व्यवस्था
चिकित्साविभाग की ओर से जिला अस्पताल में एमसीएच यूनिट शुरू करने की तैयारी तो की जा रही है, लेकिन अब तक यहां अलग से डाॅक्टरों स्टाफ की व्यवस्था नहीं होने से जिला अस्पताल में आने वाले सामान्य मरीजों काे भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। पहले से ही यहां पर कार्य कर रहे बाल रोग विशेषज्ञ, गायनिक, सर्जन अन्य स्टाफ पर एमसीएच यूनिट चलाने की भी जिम्मेदारी होगी। ऐसे में दो-दो जगह पर डाॅक्टरों की जिम्मेदारी बढ़ने से मरीजों के साथ स्टाफकर्मियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
अस्पतालमें 100 बेड की है मातृ एवं शिशु यूनिट
जिलाअस्पताल में 17 करोड़ रुपए की लागत से बनाए गए एमसीएच यूनिट में मरीजों को भर्ती कराने के लिए 100 बेड की व्यवस्था की गई है, लेकिन अब तक स्टाफ की स्वीकृति नहीं मिली है। पहले से ही अस्पताल में शिशु बाल रोग विशेषज्ञों, महिला रोग विशेषज्ञों की कमी है। लोगों का कहना है कि यूनिट को चालू करने से पहले सरकार काे यहां पर स्टाफ बढ़ाना चाहिए।
^पहले ही अस्पताल में स्टाफ की कमी है। इसलिए उच्चाधिकारियों को स्टाफ लगाने के लिए पत्र लिखा गया है। इसके बाद ही एमसीएच यूनिट को चालू किया जाएगा। -बीएसकुशवाह, पीएमओ
बारां. जिला अस्पताल परिसर में स्थित मातृ एवं शिशु यूनिट भवन।