थैरेपी की तरह है कथक नृत्य: तबिश्म पाल
कथकनृत्य एक प्रकार की थैरेपी की तरह है। इसका प्रयोग कर हम सभी प्रकार के मानसिक रोगों के साथ-साथ कई शारीरिक रोगों से भी मुक्ति पा सकते हैं। निरोग रह सकते हैं। यह उदगार प्रख्यात कथक गुरु पं.राजेंद्र गंगानी एवं डॉ. मालविका मित्रा की शिष्या तबश्मि पाल मजूमदार ने स्पिक मैके की ओर से आयोजित जिले के दो स्कूलों में नृत्य प्रस्तुति के दौरान दिए। स्पिक मैके की विरासत शृंखला के तहत सुबह साढ़े 10 बजे किशनगंज की बालिका उच्च माध्यमिक स्कूल एवं दोपहर साढ़े 12 बजे में उच्च माध्यमिक स्कूल रेलावन में प्रस्तुत अपने कार्यक्रम में तबश्मि ने दुर्गा स्तुति, गणेश वंदना, विलंबित तीन ताल इसके अलावा एक कवित्त पर अपनी प्रस्तुत दी। तत्पश्चात बच्चों को मंच पर बुलाकर अपने साथ चक्कर, पद संचालन, कथक की विभिन्न मुद्राओं का अभ्यास करवाया। कार्यक्रम की शुरूआत में दोनों स्कूलों में उन्होंने कथक के इतिहास एवं इस कला के बारे में जानकारी दी। स्पिक मैके के अजय कटारिया ने संचालन किया। प्रीतिबाला शर्मा एवं भानू आर्य ने कलाकारों का आभार माना। समन्वयक हरिमोहन बंसल ने बताया कि बुधवार को सुबह साढ़े 10 बजे मेरमाचाह एवं साढ़े 12 बजे अटरू में कार्यक्रम होंगे।