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5 साल बाद हॉस्टल निर्माण की बाधा दूर

6 वर्ष पहले
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बारां. बॉयज पीजी कॉलेज में अधूरा पड़ा गर्ल्स हॉस्टल। इसका निर्माण जल्द पूरा होने की उम्मीद है।

भास्कर न्यूज| बारां

बॉयजपीजी कॉलेज में पांच साल पहले प्रारंभ किया गल्र्स हॉस्टल का निर्माण अब पूरा होने की आस बंधी है। करीब पांच साल पहले कॉलेज परिसर में हॉस्टल का निर्माण प्रारंभ किया गया था। यह कार्य करीब 9 महीने में पूरा होना था, लेकिन काम अटक गया और पांच साल बीतने पर भी पूरा नहीं हो सका। हॉस्टल निर्माण के लिए शेष राशि भी कॉलेज प्रशासन की ओर से पीडब्ल्यूडी को एक साल पहले उपलब्ध करा दी थी, फिर भी काम अधर में ही रहा। अब उच्च शिक्षा निदेशक ने हॉस्टल का निर्माण जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं। इससे निर्माण कार्य जल्द पूरा होने की आस बंधी है।

बॉयज पीजी कॉलेज में खेल मैदान के एक तरफ एक करोड़ 17 लाख 80 हजार रुपए की लागत से गल्र्स हॉस्टल का निर्माण होना था। इसका कार्य 25 दिसंबर 2009 में प्रारंभ हुआ था। यह कार्य 24 सितंबर 2010 तक पूरा किया जाना था, लेकिन दो मंजिला भवन बनने के बाद यह कार्य अधूरा छोड़ दिया गया। साल दर साल गुजरते गए, लेकिन निर्माण पूर नहीं हो सका।

कॉलेज प्रशासन ने फरवरी 2014 में हॉस्टल निर्माण की शेष राशि 37 लाख 50 हजार रुपए पीडब्ल्यूडी को स्थानांतरित कर दी। इसके बाद पीडब्ल्यूडी की ओर से दो बार टेंडर किए गए, लेकिन किसी ठेकेदार ने काम में रूचि नहीं ली। हाल ही में तीसरी बार टेंडर किए गए हैं। इसके तहत ठेकेदार ने काम प्रारंभ कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

निदेशकने दिए जल्द निर्माण के आदेश

बॉयजपीजी कॉलेज परिसर में लंबे समय से अधूरे पड़े हॉस्टल का निर्माण पूरा कराने के निर्देश पिछले दिनों हुई बैठक में उच्च शिक्षा निदेशक ने दिए हैं। कॉलेज के कार्यवाहक प्राचार्य विजयराम मीणा ने बताया कि निदेशालय के आदेशों से पीडब्ल्यूडी को अवगत कराकर जल्द निर्माण पूरा करने के लिए कहा गया है। फिलहाल ठेकेदार की ओर से निर्माण प्रक्रिया की प्रारंभ करने की तैयारी की जा रही हैै।

अगलेसत्र में शुरू होगा हॉस्टल

कॉलेजके कार्यवाहक प्राचार्य मीणा ने बताया कि कॉलेज में अध्ययनरत छात्राएं फिलहाल गल्र्स पीजी कॉलेज के हॉस्टल और किराए से मकान लेकर निवास करती है। कई छात्राएं प्रतिदिन समीपवर्ती गांवों से भी आवाजाही करती हैं। हॉस्टल भवन का निर्माण पूरा होने पर इसे इस साल जुलाई तक प्रारंभ कर दिया जाएगा। ऐसे में छात्राओंं को आवासीय सुविधा भी मिल सकेगी।