डीजल से खेती नहीं रही आसान
विद्युतविभाग की ओर से किसानों को कृषि कार्य के लिए बिजली के कनेक्शन नहीं दिए जा रहे हैं। पिछले पांच सालों से कनेक्शन की फाइलें अटकी हुई है। इनका निस्तारण नहीं होने से किसानों के सामने सिंचाई की समस्या रही है। जिले में नहरों का जाल कम है। नहर की सुविधा नहीं होने से किसानों को कुओं, ट्यूबवैल की सिंचाई पर निर्भर रहना पड़ता है।
किसानों ने बताया कि एससी वर्ग के किसानों को वर्ष 2013 तक का कोटा दे दिया गया है, जबकि सामान्य, ओबीसी वर्ग के किसानों को वर्ष 2009 से वरीयता सूची के आधार पर कनेक्शन नहीं दिए जा रहे हैं। किसान महंगे डीजल से पंप लगाकर सिंचाई करने में अक्षम है। वर्तमान में तकरीबन 5000 कनेक्शनों की जरूरत है। विद्युत विभाग में पूरे जिले से करीब 12000 किसानों ने कृषि कनेक्शन के लिए फाइल लगा रखी है।
तीन साल से फसलों में नुकसान
किसानशिवराज, भोजराज, रामेश्वर हरिशंकर आिद ने बताया कि रबी और खरीफ सीजन में किसानों को पिछले तीन सालों से नुकसान हो रहा है। अतिवृष्टि, ओलावृष्टि अन्य आपदाओं के कारण फसलों में काफी नुकसान हो चुका है। बारां जिले में 97 प्रतिशत जनता खेती पर निर्भर है। किसान बहुल जिला होने के कारण यहां पर किसानों के लिए खास रणनीति तक नहीं बन पाई है। अब तो कृषि मंत्री भी इसी जिले से हैं, लेकिन इसके बाद भी किसानों की समस्याओं को दूर नहीं किया जा रहा है।
पार्वतीकैनाल केवल बरसात में ही चलती है
पार्वतीपिकअप वियर से नहरें केवल बारिश के दिनों में ही चलती है। बारिश के बाद नदी में पानी कम होते ही नहर में पानी बंद हो जाता है। इस स्थिति में किसानों के सामने विकल्प ही नहीं है। वे ट्यूबवैल कुओं पर आधारित िसंचाई करते हैं। इसके लिए उन्हें बिजली के ट्रांसफार्मर, पोल तारों की जरूरत होती है। किसान कांग्रेस के प्रवक्ता जोधराज नागर ने बताया कि पार्वती केनाल जिले में 30 किमी तक है। दाईं बाई मुख्य नहर से रबी सीजन में सिंचाई नहीं हो पाती है।
किसानोंका आरोप-पूरा नहीं देते हैं कनेक्शन का सामान
किसानोंने बताया कि कृषि कनेक्शन दिए जाने के दौरान विभाग के अिधकारी पूरा सामान नहीं देते हैं। कभी पोल नहीं मिलते तो कभी तार की समस्या जाती है। ट्रांसफार्मर के लिए भी बार-बार विभाग के दफ्तर में चक्कर लगाना पड़ता है। किसान कांग्रेस के अध्यक्ष रमेश मीणा ने बताया कि विभाग कनेक्शन देने के