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जांच से लेकर दवा की दरें 5.5 से बढ़कर 12 प्रतिशत तक पहुंची

4 वर्ष पहले
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जल्दही मेडिकल क्षेत्र में जीएसटी का असर दिखने वाला है। दिल, किडनी के इलाज से लेकर इंप्लांट लैंस डलवाना महंगा होगा। क्योंकि इन पर 12 से 28 फीसदी तक जीएसटी लगाया गया है। मेडिकल के इन क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि 15 अगस्त के बाद नया स्टॉक आते ही जीएसटी साइड इफेक्ट दिखाने लगेगा। ऐसे में सामान्य दवा भी 80 फीसदी तक महंगी होने की संभावना है। इनमें कुछ जीवनरक्षक दवाएं भी शामिल हैं। हालांकि अभी जिला मुख्यालय पर जिला अस्पताल में डायलिसिस मशीन को पीएम योजना के तहत पीपीपी मोड पर संचालित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए अभी तक एमओयू भी नहीं हुआ है लेकिन डायलिसिस मशीन शुरू होने के बाद खर्च सालाना 50 हजार रुपए तक बढ़ेगा। जिनको महीने में 10 से 12 बार करानी होती है। इसके अलावा पेसमेकर और डिवाइस से दिल की धड़कनों को नियंत्रित करना 15 से 50 हजार रुपए महंगा होगा। चूंकि अभी जो स्टॉक है। उसे पुरानी कीमतों पर ही बेचने के आदेश हैं। इस कारण महंगाई दिख नहीं रही। हार्ट से जुड़े विशेषज्ञों ने हैरानी जताई कि स्टेट की कीमतें कम करने वाली सरकार धड़कनों का इतना बोझ कैसे बढ़ा सकती है। किडनी के मरीजों पर डायलिसिस के बढ़ते हुए खर्च को लेकर भी चिंता जताकर इसे मुफ्त करने की बात रखी है। फील्ड के एक्सपर्ट का कहना है कि सरकार ने जीएसटी कम नहीं किया तो जल्द ही नई दरें रिवाइज करने के अलावा विकल्प नहीं बचेगा और भार मरीजों पर ही आएगा। सरकारी अस्पतालों में सप्लाई सरकार की है। इसलिए मरीजों पर भार उतना नहीं आएगा। जितना प्राइवेट अस्पतालों में नजर आएगा।

बारां. जीएसटी से दवाइयां भी हुई महंगी।

^जीएसटी लागू होने का असर पूरी तरह से 15 अगस्त के बाद देखने को मिलेगा। फिर भी बाजार में जीएसटी के अनुसार दवा आनी शुरू हो गई है। टेबलेट से लेकर सीरप तक 5.5 से 12 प्रतिशत तक दरें बढ़ी हैं। बढ़ी हुई दरों के अनुसार बाजार में इसकी बिक्री भी कुछ दुकानदारों ने शुरू कर दी है। डायलिसिस की अभी यहां पर सुविधा नहीं होने से जिले के अन्य जगह पर जाने वाले मरीजों को अब अधिक दाम चुकाना पड़ेगा।‌ -संदीपकुमार, डीआई

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