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फसलोंं के विविधीकरण से बढ़ा रहे उत्पादन

5 वर्ष पहले
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बारां| विविधीकरण,जैविक खाद, आधुनिकी तकनीकी, ड्रिप फव्वारा सिंचाई से फसलों की उत्पादकता बढ़ती है। जिले के गुलाबपुरा के किसान यह पद्धति अपनाकर फसलों का उत्पादन बढ़ा रहे हैं। खेत में विभिन्न प्रकार की फसलों की बुवाई कर अच्छा उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं।

अंता क्षेत्र के गुलाबपुरा निवासी किसान गनपतलाल नागर ने साल 2002 में ही उन्नत कृषि से नाता जोड़ लिया था। उन्होंने खेत फव्वारा सिंचाई ड्रिप सिंचाई की व्यवस्था कर रखी है। साथ ही सौर ऊर्जा के प्लांट लगवा रखे हैं। सौर ऊर्जा की बिजली से ही ड्रिप फव्वारा सिंचाई संयंत्र का संचालन करते हैं। रासायनिक खाद का उपयोग करीब डेढ़ दशक पहले की बंद कर दिया। शुरुआत में गोबर की खाद का प्रयोग किया। इसके बाद से वर्मी कम्पोस्ट प्लांट लगा लिया।

वर्मी कम्पोस्ट प्लांट से मिलने वाली खाद का उपयोग कर रहे हैं। नागर का कहना है कि खेती में फसलों का विविधीकरण तकनीकी और वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग करने से उत्पादन दोगुना तक हुआ है। नागर को कृषि में उन्नत तकनीक का इस्तेमाल करने के लिए कई बार सम्मानित भी किया जा चुका है।

औषधीय खेती, उन्नत किस्में

नागरने खेत में औषधीय सहित उन्नत किस्मों की बुवाई कर रखी है। खेत में हल्दी, कलौंजी, सफेद मूसली की पैदावार कर रहे हैं। साथ ही प्याज और धनिया की उन्नत किस्मों की फसल खेत में लहलहा रही है। प्याज की मोटाई ज्यादा है और धनिया लौंगिया रोग प्रतिरोधक है। इनके अलावा लहसुन, गेहूं, धनिया, प्याज, टमाटर की फसल कर रखी है।

^गुलाबपुरा में किसान गनपत लाल नागर जैविक खेती के साथ आधुनिक तकनीक का उपयोग कर दोगुना तक उत्पादन ले रहे हैं। उन्होंने मूसली की खेती में रिकार्ड पैदावार की है। कृषि संस्थानों की ओर से नागर को पुरस्कृत भी किया गया है। -डॉ. आईएन गुप्ता, मुख्य वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र अंता

बारां. गुलाबपुरा गांव में खेत लहलहाती धनिये की फसल।

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