बढ़ के मां-बाप से कोई सूरत नहीं...
बाड़ी| हिन्दीसेवा समिति बाडी की ओर से मनाए जा रहे हिन्दी पखवाडे का समापन अखिल भारतीय कवि सम्मेलन के साथ हुआ। सम्मेलन के मुख्य अतिथि अग्रोहा ग्रुप के चेयरमैन मुकेश सिंहल, विशिष्ट अतिथि भारत विकास परिषद जिला अध्यक्ष सुनील गर्ग, सुरेश दीक्षित, तथा अमर सिंह परमार थे। अध्यक्षता अग्रवाल सभा के अध्यक्ष मुन्नालाल मंगल ने की।
कवि सम्मेलन का प्रारंभ उरई से आई कवयित्री नीलकण्ठ द्वारा सरस्वती वंदना से हुआ। युवा कवि आकाश शर्मा ने झूला पे झूला झूले बृषभान की लली…सुनाई। गीतकार राकेश दीक्षित ने बढ़ के मां बाप से कोई सूरत नहीं, दिव्य ऐसी जमाने में मूरत नहीं, काव्य पाठ सुनाया। मैनपुरी से आये कवि लालबत्ती ने राजनीति के गलियारे में सभी उघारे लगते हैं, चरित्रवान प|ी हो तो सभी कुंवारे लगते हैं हास्य व्यंग कविता सुनाई। लखनऊ के युवा कवि कमल आग्नेय ने वीररस की रचनाएं सुनाकर श्रोताओं के रक्त में उबाल डाला। सम्मेलन में कवि श्रीराम शाक्य, हास्य कवि चाचा चौधरी, राजवीर सिंह क्रान्ति, गीतकार रवि शर्मा रवि ने तरूण श्रृंगार रस के गीत सुनाए। कार्यक्रम से पूर्व मां शारदे के समक्ष दीप प्रज्जलन माल्यार्पण किया गया। इसके पश्चात वरिष्ठ नागरिक एवं साहित्यकार रामसेवक यादव, समाज में श्रेष्ठतम कार्य हेतु राकेश गर्ग को श्रीफल देकर दुपट्टा, शाॅल ओढ़ाकर स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
बाड़ी. कवि सम्मेलन में मंच पर उपस्थित कवि।