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कागजों में बेदखल, कब्जा बरकरार

7 वर्ष पहले
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भले ही प्रशासन कितना ही दावा करते रहे कि सरकारी जमीनों को अतिक्रमण से मुक्त करा लिया गया है, मगर, यह हकीकत कोसों दूर है। स्थिति यह है कि शहर सहित जिलेभर में सरकारी भूमि एवं सिवाय चक तथा चारागाह भूमि पर अतिक्रमण के मामले बढ़ते जा रहे है। जिला मुख्यालय सहित तहसीलों तथा उप तहसीलों में ऐसे मामलों में लीपापोती कर अतिक्रमण पर सरकारी मोहर लगाई जा रही है। साथ ही अतिक्रमण करने वालों को फिक्स जुर्माना देकर छोड़ा जा रहा है। जिससे सिवाय चक भूमि पर उनका कब्जा बरकरार रह सके। क्योंकि राजस्व संबंधित प्रकरणों के निस्तारण की प्रक्रिया लम्बी है तथा ऐसे प्रकरणों की पत्रावलियों का लम्बे समय में निस्तारण हो पाता है। इसी बात का अतिक्रमी फायदा उठाते है। जिले के सभी तहसील तथा उप तहसीलों में प्रति वर्ष सिवाय चक चारागाह, जलीय स्रोत, आम रास्ता आदि पर अतिक्रमण करने के मामलों की रिपोर्ट संबंधित हल्का पटवारी एवं गिरदावर तैयार कर नायब तहसीलदार एवं तहसीलदार सौंपी जाती है। जिले में सरकारी भूमि पर अतिक्रमियों की संख्या लगभग २२ हजार है। जो कई वर्षों से सरकारी जमीनों पर कब्जा कर बैठे हैं। जिले के बीहड़ क्षेत्र, बांध तथा तालाबों की भूमि भी इन कब्जा करने वालों से नहीं बची पा रही है। जबकि जिले की विभिन्न तहसीलों से निस्तारित करीब ३०० से अधिक प्रकरणों में तहसीलदारों द्वारा सरकारी भूमि पर अतिक्रमण करने वालों को सजा सुनाई जा चुकी है। इन प्रकरणों की अपील की फाइले जिला कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट की अदालत में विचाराधीन है।

यह है भौतिक स्थिति

हालातयह है कि जिला प्रशासन के रिकॉर्ड के अनुसार उपखंड धौलपुर क्षेत्र में मार्च २०१४ तक प्रशासन की ओर से सरकारी भूमि पर अतिक्रमण के हजार ९३३ प्रकरण दर्ज किए गए थे तथा ४९९७ बीघा बिस्वा भूमि पर अतिक्रमण किया हुआ था, लेकिन प्रशासन का दावा है कि सभी भूमि को अतिक्रमणकारियों से मुक्त करा लिया गया है, लेकिन इनमें से किसी भी अतिक्रमणकारी को सजा से दंडित नहीं किया है। इसी प्रकार तहसील क्षेत्र सरमथुरा में पिछले दस वर्ष में ७७१ लोगों के खिलाफ सरकारी भूमि पर अतिक्रमण के मामले दर्ज किए थे। जिसमें से ७६८ मामलों का निस्तारण किया जा चुका है तथा शेष प्रकरणों का निस्तारण होना अभी बाकी है। जबकि पिछले दस वर्ष में लोगों ने सरमथुरा क्षेत्र में करीब १८१३ बीघा १३ बिस्वा सरकारी जमीन पर अतिक्र