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फिजां में गूंजा या हुसैन, उमड़ा जनसैलाब

7 वर्ष पहले
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फिजांमें या हुसैन या हुसैन की गंूज और अलम में मन्नत के धागे बांधने की होड़। मौका था मोहर्रम की 12 तारीख पर गुरुवार को शहर में निकले तीजे के जुलूस का।

इस दौरान बारी बारी से मुस्लिम घर परिवारों की महिलाओं ने खुद अपने बच्चों के हाथों से मन्नत के धागे बंधवाकर अमन चैन की दुआ की। इस दौरान जुलूस में मुख्य केंद्र आकर्षक ताजिया थे, जिन्हें देखने के लिए शहर में जन सैलाब उमड़ पड़ा। तीजे के जुलूस में बड़ी संख्या में ताजिए, अलम, ढोल ताशे नगाड़े शामिल थे। जिनकी तेज आवाज से जुलूस का माहौल करकश तेज ध्वनि से सुन्न हो गया।

इस दौरान बैंडबाजे मातमी धुने बजाते हुए भी चल रहे थे। जुलूस अखाडेबाजी के उस्तादों युवाओं के विभिन्न तरह के हैरतअंगेज करतब के साथ मुख्य बाजारों चौराहों से निकाला गया। इस मौके जुलूस की व्यवस्था के लिए जुलूस में कई टोली प्रभारी व्यवस्था संभाले हुए चल रहे थे। इस मौके पर पुलिस के जवान भी बड़ी संख्या में तैनात हर स्थिति पर नजर रखे हुए थे। जुलूस में बाहर शहर के अखाडेबाजों के उस्तादों ने शस्त्र संचालन का प्रदर्शन किया। इसमें तलवारवाजी, शरीर को गोदना, नगाड़ों पर लेटकर पिटना, शरीर में गर्म सरिया नुकीली सुईंयों चुभाना, नाक से चैन डालकर मुंह से निकानला, नुकीने तारों पर चलना आदि हैरतअंगेज करतब दिखाए गए।

जुलूस शहर के तलैया मोहल्ले से शाम 5 बजे प्रारंभ हुआ, जो पुराना पोस्ट ऑफिस, पुराना बस स्टैंड, गडरपुरा, बजरिया, नृसिंह रोड, हनुमान तिराहा, मोदी चौराहा, घंटाघर स्थित कर्बला पहुंचा, जहां गमगीन माहौल में ताजियों को दफनाया गया। इस मौके पर जुलूस में शामिल लोगों का जगह जगह स्वागत कर पेय पदार्थ आइसक्रीम का वितरण भी हुआ। साथ ही इस दिन तीजे के उपलक्ष्य पर घर घर में तरह तरह के पकवानों में पुलाव, जर्दा, हलीम, बिरयानी सहित कई प्रकार के पकवान तैयार किए गए। शहर में हजारों लोगों ने ताजियों की जियारत की।

जुलूस का माहौल ऐसा था कि शाम होते ही शहरवासियों के मुंह पर जुलूस देखने की बैचेनी नजर आई और लोग छतों, दुकानों पर देखने के लिए एकत्रित हो गए। हालांकि बाजार में जुलूस देर रात्रि को पहुंचा। शहर में चारों ओर ढोल ताशांे बैंडबाजों की मातमी धुनें गूंजने लगी। युवक अल्लाह अकबर, या अली, या हुसैन, हम हुएज्आदि के नारे लगाकर मातम करने लगे, जिस देख लोग दांतों तले उंगली दबाते रहे।

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