पानी के लिए करना पड़ता है घंटों संघर्ष
सैंपऊ. कस्बेमें पेयजल की व्यवस्था गड़बड़ाई हुई है, जिसे लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है। ग्रामीणों के मुताबिक कस्बे के कुछ हिस्सों में तो पर्याप्त सप्लाई रही है। बाकी हिस्सों में बिल्कुल आपूर्ति नहीं हो रही है। ऐसे में लोगों को पेयजल के लिए घंटों संघर्ष करते रहते है।
कस्बे के मिसुर पौठे के ग्रामीणों को वर्षों से पानी के लिए सुबह और शाम को संघर्ष करना पड़ता है। इसके बाद ही वह एक दो बर्तन पानी का जुगाड़ कर पाते है। ग्रामीण गोविंद शर्मा, भीकम सिहं परमार, पूर्व वार्डपंच विनोद परमार ने बताया कि पीएचईडी की लापरवाही के कारण दशकों पुरानी राइजिंग लाईन जमीन के अंदर गल चुकी है। जिसके चलते नलों में पानी का प्रेशर बहुत कम हो गया है। इससे राइजिंग लाईन में डायरेक्ट मोटर लगाकर पानी भरना पड़ता है। इतने के बावजूद भी मुश्किल से एक या दो बर्तन पानी मिलता है। ऐसे में मोहल्ला वासियों को पीने के लिए पानी का इंतजाम दूसरे मौहल्लों से करना पड़ता है। गृहिणी लता सोनी, ममता शर्मा, गुड्डी, पूनम सोनी आदि ने बताया कि तमाम इंतजाम के बाद बड़ी मुश्किल से दो एक बर्तन पानी मयस्सर हो पाता है। इस संबंध में मोहल्ला वासियों ने कई बार कनिष्ठ अभियंता गज्जू जाटव को शिकायत भी दी। बावजूद इसके अभी तक समस्या का कोई समाधान नहीं निकाला गया है।
यहांनहीं मिल रहा पानी
कस्बेके बाड़ी मार्ग, तिराहा एरिया, अस्पताल रोड, कोली बस्ती मिसुर पौठे, कन्या पाठशाला बस्ती, जाटव बस्ती, भरतपुर मार्ग आदि स्थानों पर पेयजल सप्लाई को लेकर संकट की स्थिति बनी हुई है। इन मौहल्लों में हाल तक पुराने बाजार में पूर्व की टंकी से पेयजल सप्लाई होती थी। लेकिन टंकी के टूटने के बाद से धीरे धीरे पानी मिलना ही बंद हो गया है। पीएचईडी के अधिकारियों का कहना है कि भरतपुर चंबल परियोजना के तहत कस्बे में पेयजल टंकी स्वीकृत हुई है। उसके निर्माण के बाद कस्बे की समस्त आबादी को नलों से पानी की सप्लाई दी जाएगी।
सैंपऊ. मिसुर पौठे में पानी खीचने के लिए रखी मोटरें।