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बाड़मेर रिफाइनरी: एक साल तक कागजों में रही, अगले साल तक जमीन पर आएगी

7 वर्ष पहले
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बाड़मेरमें लगने वाली रिफाइनरी के शिलान्यास को पूरा एक साल हो गया। कैलेंडर की तारीख बदल गई, मगर रिफाइनरी की तस्वीर कागजों से बाहर नहीं निकल पाई। अब एचपीसीएल और राज्य सरकार इस तस्वीर को पचपदरा की जमीन पर उकेरने के लिए कदम बढ़ा रहे हैं। राज्य के मुख्य सचिव, पेट्रोलियम के प्रिंसिपल सेक्रेटरी, रिफाइनरी के डायरेक्टर और वर्ल्ड बैंक के एग्जीक्युटिव डायरेक्टर ने दो दिन पहले ही एक कमेटी बनाई है जो पिछली सरकार में हुए एमओयू को रिव्यु कर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। उसके आधार पर राज्य हितों के संदर्भ में राज्य सरकार की भागीदारी बढ़ाई जाएगी। इस दौरान पिछले एक साल में रिफाइनरी के निर्माण के लिए जरूरी पानी की उपलब्धता का प्रपोजल तैयार किया जा चुका है। फील्ड सर्वे डिजाइन का काम चल रहा है तथा एनवायरमेंट क्लियरेंस के लिए जनसुनवाई पूरी कर केंद्र को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। एचपीसीएल राज्य सरकार को उम्मीद है कि अगले वित्तीय वर्ष से पहले जमीन पर काम दिखना शुरू हो जाएगा।

एचपीसीएलने एक कदम बढ़ाया, सरकार भी आगे आई

पिछलेएक साल का गतिरोध तोड़ते हुए एचपीसीएल ने राज्य सरकार को एक पत्र लिखा था, उस पर दो दिन पहले दिल्ली में मुख्य सचिव राजीव महर्षि, पेट्रोलियम प्रिंसिपल सेक्रेटरी डॉ. अशोक सिंघवी, वर्ल्ड बैंक के एग्जीक्युटिव डायरेक्टर सुभाष गर्ग, रिफाइनरी डायरेक्टर बीके नामदेव फाइनेंस डिपार्टमेंट के अफसरों ने बैठक की। इसमें चार जनों की रिव्यु कमेटी बनाई गई, जिसमें दो सरकार के दो एचपीसीएल के अफसर हैं।

ऐसाइसलिए हो रहा है

गतसरकार ने जो एमओयू किया था, उसके मुताबिक राज्य सरकार 56 हजार करोड़ रुपए बिना ब्याज एचपीसीएल को देने वाली थी। यह राशि हर साल 3,736 करोड़ रुपए के हिसाब से 15 साल तक देनी थी। जबकि रिफाइनरी की लागत ही 37 हजार करोड़ थी। दस हजार बीघा जमीन पर इतना पैसा देने के बावजूद राज्य की हिस्सेदारी महज 26 फीसदी थी, यह इस सरकार को मंजूर नहीं है। भाजपा सरकार ने अपने पिछले कार्यकाल में भी इसी मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया था।

एककारण यह भी

पूर्वमुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने विधानसभा चुनाव में राजनीतिक फायदे के लिए आखिरी वक्त में सोनिया गांधी से शिलान्यास कराया। मई 2013 में एमओयू किया और जुलाई 3013 में एग्रीमेंट कर आचार संहिता लगने से ठीक पहले 22 सितंबर 2013 को शिलान्यास करवा दिया। सरकार बदल गई औ