बाड़मेर। हाल में संपन्न हुए पंचायत चुनाव में शिक्षा की अनिवार्यता लागू करने के निर्णय के बाद बाड़मेर जिले की दर्जनों पंचायतों से उम्मीदवारों की ओर से जाली प्रमाण पत्र पेश करने की प्रशासन को जानकारी मिली है। कई पंचायतों से इस आशय की शिकायते मिलने के बाद प्रशासन और संबंधित अधिकारियों के हाथ-पैर फूल गए है।
भास्कर ने जब इस पूरे मामले की पड़ताल की तो सामने आया कि जिले की कई पंचायतों में उम्मीदवारों ने फर्जी शैक्षणिक प्रमाण पत्र नामांकन के साथ लगाकर पेश किए। इसके बाद चुनाव भी लड़ा और कई प्रत्याशियों ने गांव की बागडोर भी संभाल ली। प्रशासन ने इस मामले में निर्वाचन आयोग से मार्गदर्शन मांगा। निर्वाचन आयोग की अोर से दिए गए जवाब में कहा गया है कि जिन अभ्यर्थियों ने फर्जी प्रमाण पत्र पेश किए है उनके खिलाफ जिला निर्वाचन अधिकारी भादंसं की धारा 191 एवं 193 के तहत सक्षम न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत करें। इसके अलावा पंच,सरपंच,पंचायत समिति सदस्य,जिला परिषद सदस्य के विरुद्ध नामांकन के साथ गलत घोषणा पत्र अथवा मिथ्या साक्ष्य प्रस्तुत करने की शिकायत पर सात दिन में जांच करने के निर्देश दिए है।
सत्यापन करवा रहे है
इस संबंध में अभी तक हमारे पास करीब 15 शिकायतें आई है। जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक और माध्यमिक को जांच करने के निर्देश दिए है। सरदारसिंह,पंचायतप्रसार अधिकारी
हमारे पास शिकायत नहीं आई
इस संबंध में हमारे पास अभी तक कोई शिकायत या पत्र नहीं आया है। जब मिलेगा तब जांच करके रिपोर्ट दे देंगे। पीपी व्यास,डीईओ (माध्यमिक)
नहीं कर पाए है अभी तक जांच
^जीते हुए प्रत्याशियों के बारे में कुछेक शिकायतें आई है। अभी तक चुनावों में ड्यूटी के कारण जांच नहीं कर पाए है। पृथ्वीराजदवे, डीईओ (प्रारंभिक)
बाहरी राज्यों की जांच में होगी देरी
चुनाव में नामांकन के साथ पेश किए गए राजस्थान के बाहर के प्रदेशों की शैक्षणिक प्रमाण पत्रों की जांच में प्रशासन को खासी मशक्कत करनी पड़ेगी। बताया जा रहा है कि स्थानीय स्तर पर तो इस संबंध में जांच ही नहीं हो पाएगी। इसके लिए प्रशासन को टीम गठित कर संबंधित संस्थान में जाकर भौतिक सत्यापन करना होगा। इसके बाद ही प्रमाण पत्र के असली और नकली का पता चल पाएगा।
ग्राम पंचायत रेडाणा। यहांसे चुनी गई सरपंच गीतांकवर के दसवीं की मार्कशीट माध्यमिक शिक्ष परिषद उत्तरप्रदेश की राजकीय क्वीन इंटर कॉलेज वाराणसी की है। सरपंच के आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के पद पर चयन के दौरान दी गई आठवीं उत्तीर्ण और हाल में दी गई दसवीं उत्तीर्ण की मार्कशीट में जन्मतिथि अलग-अलग। ग्रामीणों का आरोप मार्कशीट के हिसाब से पहले दसवीं उत्तीर्ण और बाद में आठवीं उत्तीर्ण की।
ग्राम पंचायत शहदाद का पार। यहांसे हाल ही में निर्वाचित हुई सरपंच ने माध्यमिक शिक्ष परिषद उत्तरप्रदेश से हाई स्कूल उत्तीर्ण की। नामांकन पत्र के साथ दाखिल इस अंक तालिका को सरपंच केसर ने स्वयं सत्यापित किया। भास्कर ने जब इस मार्कशीट के रोल नंबर के आधार पर पड़ताल की तो यह अंक तालिका केसर के बजाय सचिन कुमार पुत्र रामचंद्र सिंह के नाम से निकली।
ग्राम पंचायत आरंग। यहांकी सरपंच बनी कंवरा ने अपने नामांकन पत्र के साथ दाखिल शैक्षणिक योग्यता का प्रमाण पत्र हरियाणा राज्य के उमरा गांव से लाई। राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान की ओर से जारी इस प्रमाण पत्र के भी नकली होने का संदेह। भास्कर ने जब इसकी पड़ताल की तो पता चला कि ओपन स्कूलिंग की ओर से जारी प्रमाण पत्र का नमूना ही अलग होता है।
शिव क्षेत्र के रा प्रा वि कोटड़ियों की ढाणी। एकही दिन 24 सितंबर 2014 को एक साथ 34 टीसी कटी। इन 34 में से 4 सरपंच बने। आरोप स्कूल के प्रधानाध्यापक किशनाराम गर्ग ने टीसी जारी करने में फर्जी वाड़ा किया। अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर इसने साक्षरता एवं सतत शिक्षा के तहत सी लेवल (आठवीं उत्तीर्ण समकक्ष) की दर्जनों टीसी जारी की।