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जीवन निर्माण में श्रेष्ठ शिक्षा आवश्यक: प्रजापति
बाड़मेर. केवलपरीक्षा पास करना ही हमारी शिक्षा पद्धति नहीं , बल्कि संस्कारवान शिक्षा ही श्रेष्ठ शिक्षा होती है। लॉर्ड मैकाले की शिक्षा नीति ने हमारी शिक्षा, संस्कार संस्कृति को बर्बाद कर दिया। इसलिए वर्तमान चुनौतियों के लिए हमें भारतीय शिक्षा पद्धति के अनुसार श्रेष्ठ शिक्षा की महती आवश्यकता है ये विचार विद्या भारती द्वारा प्रेरित आदर्श विद्या मन्दिर में आयोजित मातृ सम्मेलन में बतौर मुख्य वक्ता वासुदेव प्रजापति ने व्यक्त किए।
विद्यालय का प्रतिवेदन बलदेव व्यास प्रधानाचार्य माध्यमिक ने प्रस्तुत किया मुख्य अतिथि चंपा चौधरी (ब्लॉक प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी बायतु) ने मातृ शक्ति को कहा कि मां शब्द से ही ममता का भाव पैदा होता है। मां जैसा चाहे बालक का निर्माण कर सकती है। शिक्षा केवल नौकरी के लिए नहीं व्यवस्थित जीवन जीने के लिए भी शिक्षा आवश्यक है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. पंकज चौधरी (चिकित्साधिकारी बायतु) ने मातृ शक्ति से आग्रह किया कि बालक का पालन-पोषण श्रेष्ठ प्रकार से हो। जिसमें आनंद की अनुभूति हो। बालक जैसा बनाना चाहे, वैसा वातावरण देना हमारा प्रथम कर्तव्य है। इसलिए मां को बालक का प्रथम गुरू माना है। विशिष्ट अतिथि अणदु देवी ने कहा कि बाल्यकाल में बालक जैसा संस्कार सीखता है, वे संस्कार बालक के जीवन में बहुत ही महत्वपूर्ण होते हैं।