हरि सुमरिन बिना जीवन अधूरा : संत सुखराम
बाड़मेर. रामचौक स्थित रामस्नेही रामद्वारा के प्रांगण में चल रही संगीतमय श्रीराम कथा के तीसरे दिन रविवार को युवा रामस्नेही संत सुखराम ने कहा कि हरि का साथ ऐसा होना चाहिए जैसे जल बिन मछली, मणी बिन नागराज नहीं रह सकते। इसी प्रकार हरि का सुमरिन बिना हमारा जीवन अधूरा है। कथा में संत ने हरि को प्राप्त करने की पांच स्थितियां बताते हुए कहा कि हरि का नाम जप-तप करना बहुत कठिन है लेकिन जिसने कर लिया उसका बेड़ा पार हो जाएगा। श्रीरामद्वारा सत्संग मण्डल के मीडिया प्रभारी राजाराम सर्राफ ने बताया कि रविवार को संगीतमय राम कथा में भगवान शिव के शृंगार का वर्णन किया गया जिस पर भजन गायकों ने डमरू वाले बाबाजी तेरा रूप अनेक निराला है..सहित कई सुमधुर भजन प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। कथा में भगवान श्रीराम का प्राकट्योत्सव मनाया गया। भय प्रकट कृपाला दीन दयाला कौशल्या हितकारी के भगवान श्री राम जन्मोत्सव की तैयारी की गई। भजन गायक ग्यारसी लाल जयंतीलाल ने राजा दशरथ जी के आज बधाई बाच रही, अवध में आनंद भयो, जय हो रघुवरलाल की प्रस्तुति कर सभी का मन मोह लिया, पूरे भक्त खुशी से झूमने लगे। कथा के बाद यजमान परिवार के नारायणदास, मनोहरलाल, ओमप्रकाश, दीपक मूथा ने सप|ीक रामायणजी की आरती उतारी। कथा में श्रीराम खत्री, गुलाब खत्री, कैलाश गुप्ता, जसोदा मोदी, सुमित्रा राव, मधु सर्राफ, भगवती मूथा, निखिल मूथा सहित कई भक्त, राधे सत्संग मण्डल, जानकी अग्रवाल सत्संग मण्डल, रामद्वारा सत्संग मण्डल की महिलाएं उपस्थित रहीं।