फसल उत्पादन पर मौसम का असर : डॉ.पगारिया
मौसममें हो रहे बदलाव, बारिश की अनिश्चितता से वर्तमान में फसलों का उत्पादन प्रभावित हो रहा है। प्राकृतिक संसाधनों की कमी से कृषि लागत में वृद्धि और खेती से प्राप्त आमदनी में होने वाली गिरावट कृषि के लिए गंभीर समस्या है।
ये विचार केवीके के प्रभारी डाॅ. प्रदीप पगारिया ने केन्द्र पर आत्मा अन्तर्गत आयोजित 2 दिवसीय महिला कृषक प्रशिक्षण में उपस्थित महिलाओं से कही। उन्होंने कहा कि विभिन्न अनुसंधानों द्वारा विकसित नई कृषि तकनीक, उन्नत बीजों नवाचारों द्वारा खेती को लाभकारी व्यवसाय का रूप दे सकते हैं।
कृषि विभाग के उपनिदेशक के.एल. वर्मा ने महिलाओं से कहा कि खेती का ज्यादातर कार्य महिलाएं करती हैं। ऐसे प्रशिक्षण महिलाओं के लिए बहुत जरूरी है। कृषि विभाग के सहायक कृषि अधिकारी पदमसिंह भाटी ने विभाग द्वारा देय विभिन्न योजनाओं की जानकारी देने के साथ ही उन्नत कृषि विधियों के बारे में चर्चा की। केन्द्र के पादप रोग विशेषज्ञ शंकरलाल कांटवा ने विभिन्न फसलों में होने वाले विभिन्न रोग उनकी पहचान बताते हुए रोकथाम की जानकारी दी। केन्द्र के पशुपालन विशेषज्ञ आदित्य गोदारा ने मौसमी बीमारियों की जानकारी देते हुए दुधारू पशुओं से अधिक दुग्ध उत्पादन प्राप्त करने की जानकारी दी। केन्द्र के वैज्ञानिक श्यामदास ने खरीफ फसलों के विभिन्न प्रकार के उन्नत बीजों की जानकारी दी। उद्यानिकी विशेषज्ञ बुधाराम ने बाड़मेर में लगने वाले विभिन्न उद्यानिकी फसलें बेर, अनार, आंवला, खजूर सब्जी उत्पादन की विधियां बताते हुए गृहवाटिका के स्थापना की जानकारी दी। कार्यक्रम सहायक सुनील राखेचा ने बताया कि कार्यक्रम के अंत में महिलाओं के लिए प्रश्नोतरी का आयोजन हुआ जिसके विजेता रहे प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया।