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प्रभु के स्मरण मात्र में ताकत : संत सुखराम
रामचौक स्थित रामस्नेही रामद्वारा में नौ दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा के चौथे दिन सोमवार को युवा रामस्नेही संत सुखराम ने राम-सीता विवाह स्वयंवर का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि प्रभु के स्मरण मात्र में इतनी ताकत है कि हजारों बलिष्ठ धुरंधर राजा महाराजों द्वारा स्वयंवर में धनुष को उठाया तक नहीं गया जबकि दशरथ नंदन श्रीराम ने भगवान महादेव को श्रद्धा से याद कर कर शिव धनुष को उठा उसे तोड़ दिया। भले ही व्यक्ति कितना ही बलशाली हो, लेकिन प्रभु की शक्ति के बिना वह अपने कार्य को सिद्ध करने में चुक करेगा। संगीतमय कथा में कथावाचक रामस्नेही संत ने भगवान राम की बाल लीला, गुरुकुल में पढ़ने जाना। ऋषि विश्वामित्र के यज्ञ में विघ्न डाल रहे असुरों का वद्य करना, ताड़का वध का वर्णन किया। संत ने कहा कि मनुष्य का जीवन भी एक यज्ञ है। जीवन जीने के लिए कई कठिनाइयों से गुजरना पड़ता है। कथा में संगीतमय भजनों की प्रस्तुति सुमेरपुर के ग्यारसीलाल जंयतिलाल ने भगवान की बाल लीला पर ठुमक-ठुमक कर चलत रामचंद्र, बाजे तो है झम-झमिया.., भगवान राम द्वारा धनुष तोड़ने के प्रसंग पर धनुष बड़ों विकराल, रघुवर छोटो सो, छोटो-छोटो मती करो, यो पूर्ण ब्रह्म अवतार पर पूरा कथा स्थल झूमने लग गया। संत ने धनुष तोड़ने के बाद भगवान राम-सीता विवाह की वर्णन करते हुए कहा कि रघुवर की शादी में सभी देवताओं ने करतल ध्वनि से भगवान रामचंद्र की जय जयकार की। भजन गायक ने सीता स्वयंवर के बाद जय माला की वेला पर.., जय माला है हाथ में, हरि ने सीता पहनाए.., सीता थोड़ी छोटी सी, झुक जाओ राजकुमार थाने झुकनो पड़सी जी.. की प्रस्तुति दी। इस पर सभी ने सियावर रामचंद्र के जैकारे लगाए। कथा में यजमान नारायणदास, मनोहरलाल, ओमप्रकाश, दीपक मुथा ने रामायण की आरती उतारी। मंगलवार को कथा में परशुराम-लक्ष्मण संवाद चारों भाईयों का विवाह, अयोध्या में विवाहोत्सव, राम वनवास की प्रसंग रहेगा।