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पानी चोरी की जानकारी अब चंद सैकंड में

7 वर्ष पहले
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यहएक इलेक्ट्रॉनिक पद्धति है जिससे किसी भी मशीन को विभिन्न पैरामीटरों पर जांचा जा सकता है। यह सिस्टम कंप्यूटर की मदद से काम करता है। आवश्यकता पड़ने पर मशीन को नियंत्रित भी किया जा सकता है। पश्चिमी राजस्थान की इस महत्वपूर्ण परियोजना से जनता को मिलने वाले पानी की गुणवत्ता और मात्रा का हिसाब रखने के लिए अभी नर्मदा प्रोजेक्ट के तहत पूरी पाइप लाइन पर स्काडा सिस्टम से काम चलाया जा रहा है। जलदाय विभाग द्वारा इस सिस्टम से पूरी परियोजना के पेयजल वितरण और बिजली खर्चे का हिसाब रखा जाएगा। इस सिस्टम से सभी रिजर्व वायर और पंपिंग स्टेशनों को भी जोड़ा जाएगा ताकि मशीनों से मिलने वाले पानी और उनकी क्षमता का पता लग सके। इस सिस्टम की खास बात यह होगी कि यदि किसी मशीन में कोई गड़बड़ी रही है या वह नियंत्रण से बाहर हो रही है, तो उसे नियंत्रित किया जा सकेगा।

^ स्काडा उन नई तकनीक में से एक है जो पानी की चोरी और अपव्यय पर अंकुश लगाने में सक्षम है। अरनियाली से मुनाबाव तक के तीन सौ पैतालीस किलोमीटर लंबी पूरी पाइप लाइन अलग-अलग पांच सेंसर के जरिए नियंत्रित रहेगी। विभाग के अधिकारी इस पूरी पाइप लाइन की नियंत्रण कक्ष के जरिए नियंत्रित किया जाएगा। नेमारामपरिहार, अधीक्षणअभियंता व्रत, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग बाड़मेर

^नर्मदा नहर आधारित पेयजल परियोजना में पड़ने वाले दो सौ पांच गावों के लोगों को पानी के लिए जागरूक किया जाएगा। जनता को इसकी जानकारी फिल्म और पोस्टरों के जरिए दी जाएगी। लोगों में पानी की बचत और पानी के अपव्यय को रोकने के लिए जागरण का पथ पढ़ाया जाएगा। अशोकसिंह राजपुरोहित, जिलाआईईसी समन्वयक,सीसीडीयू बाड़मेर

बाड़मेर. पानी चोरी रोकने के लिए स्काडा तकनीक नियंत्रण कक्ष। फाईल फोटो