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अणुव्रत के संदेश को आत्मसात करें

7 वर्ष पहले
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बाड़मेर. अणुव्रतसमिति द्वारा तेरापंथ भवन भिक्षु कुंज में अणुव्रत सप्ताह के तहत साध्वी कनक रेखा के सान्निध्य में अणुव्रत प्रेरणा दिवस मनाया गया। जिसमें अणुव्रतों की जानकारी देते हुए आचार्य तुलसी जन्म शताब्दी वर्ष पर अनेक लोगों ने अणुव्रती बनने का संकल्प लिया।

इस अवसर पर साध्वी कनक रेखा ने कहा कि आचार्य तुलसी धर्माचार्य थे उनका दृष्टिकोण व्यापक था। आचार्य तुलसी ने स्वतंत्रता के बाद नैतिकता आंतरिक दासता से मुक्ति के लिए अणुव्रत आंदोलन का सूत्रपात किया। कन्याकुमारी से कलकत्ता तक पैदल यात्रा कर अणुव्रतों को अपनाने का संदेश दिया। उस समय हिंसा, आतंक से जब मानव-मानवता से खिसक रहा था तब उन्होंने नारा दिया-इंसान पहले इंसान, फिर हिंदू या मुसलमान। अणुव्रत को अपने आचरण में उतारना चाहिए। कार्यक्रम में डाॅ. बंशीधर तातेड़ ने कहा कि अणुव्रत को लघुता से प्रभुता की ओर ले जाने का व्रत बताया जिसे प्रत्येक धर्म के व्यक्ति को सहजता से स्वीकार करना चाहिए। अणुव्रत के संदेश को आज की पीढ़ी संचार के माध्यम से विकसित कर सकती है। अणुव्रत समिति के मंत्री मनीष मेहता ने बताया कि कार्यक्रम का मंगलाचरण तेरापंथ कन्या मंडल अणुव्रत गीत के माध्यम से किया गया। अणुव्रत समिति अध्यक्ष मुकेश जैन ने स्वागत भाषण दिया। तेरापंथ सभा के संरक्षक केवलचंद मेहता अणुव्रत समिति के संरक्षक मीठालाल चौपड़ा ने अणुव्रत के व्यापक संदेश को जीवन में उतारने का संकल्प लेने की बात कही। तेरापंथ कन्या मंडल की संयोजिका बुलबुल भंसाली मनीष मेहता ने आचार्य तुलसी के संदेश की जानकारी दी।