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संसार में रहकर इच्छाओं की पूर्ति असंभव : सौम्यगुणा

7 वर्ष पहले
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बाड़मेर. जिन कांतिसागरसूरि आराधना भवन के प्रांगण में साध्वी सौम्यगुणा ने कहा कि चार गति रूप संसार के स्वरूप का विचार करना, संसार भावना है। संसार का एक अर्थ कषाय भी है। सर्व जगत कषायाधीन है। संसार का दूसरा स्वभाव है कि यहां एक इच्छा पूरी होती है कि दूसरी खड़ी हो जाती है। ऐसा अनंत समय से चल रहा है। संसार का तीसरा स्वभाव है कि यहां एक चिंता दूर होती है कि दूसरी उत्पन्न हो जाती है। इस संसार में कदम-कदम पर आपत्तियां हैं, इन दुखों का अंत साधक व्यक्ति ही कर सकता है।

साध्वी ने कहा कि यह संसार एक भयंकर अटवी के समान है। इस जंगल में लोभ का दावानल सुलग रहा है, उसे बुझाना मुश्किल है। लाभ रूपी इच्छा से लोभ का दावानल बढ़ता जाता है। दूसरी तरफ मृग तृष्णा के समान विषय तृष्णा पीड़ित कर रही है। संसार में धन का मोह खतरनाक है। इस संसार में बाह्य उपाधियों का अंत नहीं है। यह संसार एक रंगमंच है, नाटक है, मुसाफिर खाना है। अनेक जीवों का संयोग अंतत छूटने वाला है। संसार एक इन्द्रजाल है यहां यथार्थ कुछ भी नहीं है। संसार की सुख-समृद्धि जीव को ठग रही है। यह संसार मोह की विडंबना से भरा हुआ है।

साध्वीवर्या संवेग प्रज्ञा श्रमणी प्रज्ञा के मासक्षमण (30 उपवास) की तपस्या के उपलक्ष्य में आयोजित पंचान्हिका महोत्सव के प्रथम दिन दोपहर में साध्वी सौम्य गुणा की पावन निश्रा में विधिकारक राजू भाई मलकापुर वालाें ने महोत्सव के लाभार्थी परिवार शांतिलाल नीरजकुमार छाजेड़ सहित श्रद्धालुओं ने अष्टप्रकारी पूजा 108 दीपक की महाआरती के साथ मांडला (रंगोली) की संरचना की।

रात में गोलेच्छा डूंगरवाल ग्राउंड में पालीतणा से आए संगीतकार संजय भाई ने साध्वीवर्या के तपस्या निमित्त भक्ति भावना का कार्यक्रम संपन्न हुआ।

दादागुरुदेव महापूजन सांस्कृतिक कार्यक्रम आज

जिनकांतिसागरसूरिआराधना भवन में पंचान्हिका महोत्सव के दूसरे दिन गुरुवार को दोपहर साध्वी सौम्यगुणा की निश्रा में 71 जोड़ों के साथ दादा गुरुदेव का महापूजन संपन्न होगा।

रात्रि में गोलेच्छा डूंगरवाल ग्राउंड में बालक-बालिकाओं महिलाओं द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति दी जाएगी।

बाड़मेर आराधना भवन में उवसग््हरं महापूजन करते लाभार्थी परिवार।