क्षमता के अनुरुप तप-जप करें: संत सुखराम
बाड़मेर. रामचौकस्थित रामस्नेही रामद्वारा के प्रांगण में चल रही संगीतमय श्रीराम कथा में रामस्नेही युवा संत सुखराम महाराज ने कथा के दूसरे दिन कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुरुप तप करना चाहिए। ऐसा करने से ही प्रभु की भक्ति पूर्ण होगी। हमेशा प्रभु का नाम समुरिन करना चाहिए ताकि वह अपने जीवन में सफल हो सके। श्री रामस्नेही रामद्वारा सत्संग मण्डल के मीडिया प्रभारी राजाराम सर्राफ ने बताया कि संत श्री ने संगीतमय रामकथा में भगवान शिव-सती का आपसी संवाद का वाचन किया। भगवान शिव से सती ने कहा कि श्रीराम नाम में इतनी शक्ति है तो उनकी प|ी को कोई हरण करके ले जाए ऐसा में नहीं सोच सकती। इस पर शिव ने उत्तर में कहा कि यह तो भगवान राम की नर लीला थी। इस पर भजन गायक जयंतीलाल तबलावादक जयंतीलाल ने राम के भजन प्रस्तुत किए। कथा में संत श्री ने राजा दक्ष का वाचन करते हुए कहा कि किसी को बिना बुलाए किसी के यहां नहीं जाना चाहिए। रामकथा में भगवान शिव-पार्वती विवाह के प्रसंग का वर्णन करते हुए संत ने शिव के गुणों का बखान किया। भगवान शिव की बरात पर भजन गायक ने नंदी पर हो के सवार भोले जी चले दुल्हा बनने..पर कथा श्रवण करने वाले आनंदमय हो गए। महिला मंडलों की सदस्या डॉ. बी.डी. सिंहल, शंकरलाल मोदी, प्रेम बंधु, राजाराम सर्राफ, मदन सोनी, कैलाश गुप्ता मौजूद थे।