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विपरीत परिस्थिति में मुस्कराना आर्ट ऑफ लाइफ : ललितप्रभ

6 वर्ष पहले
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बाड़मेर. जीवन में विपरीत परिस्थिति आना पार्ट ऑफ लाइफ है, लेकिन उस परिस्थिति में चेहरे पर मुस्कान और मन में शांति रखना आर्ट ऑफ लाइफ है। अगर जीवन में विपत्ति आए तो हम आपत्ति करें क्योंकि दूध फटने पर वे ही लोग उदास होते हैं जिसे रसगुल्ला बनाना नहीं आता।

यह बात हमीरपुरा स्थित जिन कांतिसागर सूरी आराधना भवन में शनिवार को आयोजित सभा में संत ललित प्रभ सागर ने कही।

मच्छर काटने से बुखार आता है, बुरी बात सुनने पर पर मन में खार आता है लेकिन संतों की वाणी सुनने से जीवन में निखार जाता है। हर व्यक्ति को प्रतिदिन आधा घंटा अच्छे संतों का, श्रेष्ठ किताबों का सत्संग जरूर करना चाहिए।

इस दौरान श्री जैन श्वेतांबर खरतरगच्छ संघ के अध्यक्ष रतनलाल संखलेचा ने बताया कि संत ललितप्रभ ने बाड़मेर में 35 वर्ष पूर्व जैन दीक्षा स्वीकार की थी। पूर्व अध्यक्ष नैनमल भंसाली ने कहा कि संत ललितप्रभ ने दस वर्ष पूर्व यहां चातुर्मास किया। डॉ. मुनि शांतिप्रिय सागर बाड़मेर के पहले युवा संत हैं। मुनि बनने के बाद वे पहली बार बाड़मेर आए हैं।

संत ललित प्रभ सागर रविवार सुबह श्री वर्धमान जैन मंदिर में प्रवचन देंगे। कार्यक्रम में जैन श्री संघ अध्यक्ष संपत बोथरा, नाकोड़ा तीर्थ अध्यक्ष अमृतलाल छाजेड़, कुशल वाटिका अध्यक्ष भंवरलाल छाजेड़, गोपाल गोशाला के शंकरलाल पहाड़िया, सुमेर गोशाला के अध्यक्ष जेठमल जैन, वीरचंद वडेरा, सोहन बोथरा, बाबूलाल टी बोथरा, शांतिलाल छाजेड़, संपत बोथरा, रावतमल छाजेड़, डॉ. रणजीतमल मालू, पोकरदास मालू, केवलचंद छाजेड़, एडवोकेट मुकेश जैन कई श्रद्धालु मौजूद थे।

बाड़मेर. संत ललित प्रभ सागर के नगर प्रवेश परनिकाली शोभायात्रा।