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संत बोले - युवा दया पर नहीं परिश्रम कर जिएं
संतललितप्रभ सागर ने कहा कि अगर आप शांति चाहते हैं तो जो हासिल है उसे पसंद कीजिए। सफलता चाहते हैं तो जिसे पसंद करते हैं उसे हर हाल में हासिल कीजिए। किस्मत जगाने के लिए दूसरों पर निर्भर रहना बेवकूफी है।
यह बात संत ललितप्रभ सागर ने गुरुवार को गडरा रोड स्थित आदर्श विद्या मंदिर में प्रवचन के दौरान कही। उन्होंने कहा कि भाप बनने के लिए पानी का उबलना और दीवार में कील ठोकने के लिए तकिये की बजाय हथौड़ा जरूरी है। ठीक वैसे ही भाग्य को खोलने के लिए पुरुषार्थ जरूरी है।
संत ने कहा कि जीवन में किसी काम को छोटा समझें और आज जहां खड़ा है वहां तक सीमित रहे। हमेशा आगे बढ़ने के सोच रखें। हम मुफ्त की कमाई की बजाय मेहनत में विश्वास रखें।
उन्होंने कहा कि सफलता का राज पूरी ताकत झोंक दो। याद रखें, कोई भी परिश्रम और प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाता। अगर कर्म फूटा इंसान भी कठोर पुरुषार्थ करना शुरू कर दे तो वह भी सोये भाग्य को खोल सकता है। युवा बाप कमाई और पाप कमाई में नहीं, आप कमाई में विश्वास रखें। संत ललितप्रभ का आदर्श विद्या मंदिर पहुंचने पर प्रधानाचार्य, विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं छात्राें ने स्वागत किया।
बाड़मेर. गडरा रोड स्थित आदर्श विद्या मंदिर मेंप्रवचन सुनते विद्यार्थी।