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बदहाल बाड़मेर, तंगहाल नगर परिषद

6 वर्ष पहले
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नएबोर्ड के गठन को ढाई माह से ज्यादा का समय बीत गया है, लेकिन अब तक कमेटियों का गठन भी नहीं हुआ है। इससे शहर में विकास के काम ठप पड़े है। नए बोर्ड के गठन के बाद से शहर के सौंदर्यीकरण और विकास को लेकर कई उम्मीदें लगाई बैठी है, लेकिन हालात ऐसे है कि बोर्ड के पास विकास के लिए बजट भी नहीं है।

गत बोर्ड के अंतिम एक साल में शहर के विकास पर 100 करोड़ से ज्यादा की राशि खर्च कर दी गई। अब बोर्ड के पास केवल 3 करोड़ बचे है, जबकि 3 करोड़ से ज्यादा के बिल बकाया है। एक साल में बोर्ड की आय के स्त्रोत बंद पड़े है। नए बोर्ड गठन के बाद विकास के कामों पर रोक लगा दी गई हैं।

टूटी सड़कों पर उड़ते धूल के गु्बार, जगह-जगह लगे कचरे के ढेर, आवारा पशुओं के झुंड, रात के समय अंधेरे में गली- मोहल्ले, अतिक्रमण, बिगड़ी यातायात व्यवस्था ये नजारे बाड़मेर शहर के है। जहां नया बोर्ड गठन हुए ढाई माह से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन शहर बदहाली पर आंसू बहा रहा है।

Q :ढाई माह हो गए कमेटियां गठित नहीं हुई ऐसा क्यों?

A:इतने दिन पंचायत चुनाव चल रहे थे, अब समय मिला है। 16 फरवरी को बैठक में कमेटियां गठित होगी।

Q:ढाई माह में शहर में विकास के नाम कुछ भी नहीं हुआ ऐसा क्यों?

A:नए बोर्ड प्लानिंग के साथ काम करवाएगा ताकि एक ही काम पर बार-बार सरकारी पैसा खर्च नहीं हो। हम सड़क बनाने वाले ठेकेदार से तीन साल की गारंटी की जिम्मेदारी देंगे। टूटने पर वहीं ठेकेदार मरम्मत करेगा।

Q:बोर्ड के पास बजट कितना है?

A:नए बोर्ड के पास बजट नहीं है। नियमन सहित आय के बड़े काम बंद है। अब बोर्ड के पास 3 करोड़ रुपए है और 3 करोड़ के बिल बकाया पड़े है।

Q:जनता ने कांग्रेस को बोर्ड बनाने का मौका दिया, लेकिन आपने काम बंद करवा दिए। ऐसा क्यों?

A:हमने काम बंद नहीं करवाए है। प्रत्येक काम को व्यवस्थित ढंग से करने में समय लगता है। चार बड़ी सड़कों को पेवर वे बनाया जाएगा, इसकी सबसे पहले स्वीकृति दी जाएगी। सीवरेज, केबल, पानी लाइन के लिए सड़कों को तोड़ दिया जाता है। अब संबंधित विभाग को ही सड़क बनाने की जिम्मेदारी दी है।

> मुख्यकार्यकारी कमेटी :यह कमेटी सभापति लूणकरण बोथरा के पास रहेगी। इसमें नौ सदस्य होंगे।

> वित्तसमिति :इस कमेटी की जिम्मेदारी पार्षद नरेश देव या किशोर शर्मा को दी जा सकती है।

> स्वच्छताएवं स्वास्थ्य समिति :उप सभापति प्रीतमदास जीनगर यह कमेटी की जिम्मेदारी अपने पास रखेंगे।

> भवनअनुज्ञा समिति :इस कमेटी में बलवीर माली, प्रीतमदास सोनी सुल्तान सिंह के संभावित नाम सामने रहे हैं।

> सौंदर्यकरणएवं यातायात समिति : पार्षददिलीपसिंह गोगादे मिश्रीमल को सौंदर्यकरण यातायात समिति की जिम्मेदारी मिल सकती है।

> नियमएवं उप विधि समिति: पार्षदपितांबर दास सोनी को नियम एवं उप विधि समिति की जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना है।

> मेला,उत्सव समिति : पार्षदरेणु दर्जी को दिए जाने की संभावना है।

> अपराधका शमन एवं समझौता समिति : मनोहरकंवर या अंजना जैन की जिम्मेदारी मिल सकती है।

> विकाससमिति :मिश्रीमल, किशोर शर्मा को जिम्मेदारी दी जाने की संभावना है।

> विद्युतआपूर्ति समिति :इसकी जिम्मेदारी शारदा माली बलवीर माली को दी जा सकती है।

नगर परिषद जहां तो जनप्रतिनिधि और ही मिलते है अधिकारी-कार्मिक।

बाड़मेर. शहर की दुर्दशा बयां करती शहीद चाैराहेे के निकट क्षतिग्रस्त सड़क।

13.50 लाख की वसूली अटकी

एकतरफ परिषद के बजट का टोटा है, जबकि दूसरी तरफ लाखों रुपए समय पर वसूली नहीं होने से अटके हुए है। नगर परिषद की दुकानों के किराए पेटे 13.50 लाख रुपए बकाया है। इनमें पालिका बाजार के बाहर की दुकानें, नगर परिषद की दुकानें, तिलक बस स्टैंड, नई सब्जी बाजार सहित कई दुकानें शामिल है।

शहर के विकास के लिए नए बोर्ड गठन के 78 दिन बाद 16 फरवरी को कमेटियों का गठन किया जाएगा। राजस्थान नगर पालिका अधिनियम 2009 की धारा 55(5) के तहत नए बोर्ड गठन के 90 दिन के अंदर कमेटियों का गठन आवश्यक है। इस समय में अगर कमेटियां गठित नहीं की जाती है तो इसके बाद स्वीकृति राज्य सरकार देगी। संभवत: 16 फरवरी को कमेटियों के गठन के साथ नई जिम्मेदारी दी जाएगी। किस कमेटी में किसको क्या पद मिलना है, इस पर घमासान होना तय है। इसके लिए खींचतान शुरू हो गई है।

13.50 लाख की वसूली अटकी

एकतरफ परिषद के बजट का टोटा है, जबकि दूसरी तरफ लाखों रुपए समय पर वसूली नहीं होने से अटके हुए है। नगर परिषद की दुकानों के किराए पेटे 13.50 लाख रुपए बकाया है। इनमें पालिका बाजार के बाहर की दुकानें, नगर परिषद की दुकानें, तिलक बस स्टैंड, नई सब्जी बाजार सहित कई दुकानें शामिल है।

शहर के विकास के लिए नए बोर्ड गठन के 78 दिन बाद 16 फरवरी को कमेटियों का गठन किया जाएगा। राजस्थान नगर पालिका अधिनियम 2009 की धारा 55(5) के तहत नए बोर्ड गठन के 90 दिन के अंदर कमेटियों का गठन आवश्यक है। इस समय में अगर कमेटियां गठित नहीं की जाती है तो इसके बाद स्वीकृति राज्य सरकार देगी। संभवत: 16 फरवरी को कमेटियों के गठन के साथ नई जिम्मेदारी दी जाएगी। किस कमेटी में किसको क्या पद मिलना है, इस पर घमासान होना तय है। इसके लिए खींचतान शुरू हो गई है।

नए बोर्ड के गठन के साथ ही शहर की जनता ने जो विकास और सुविधाओं की उम्मीदें संजाेई थी वह पूरी नहीं हो पाई है। मुसीबतों के पहाड़ शहर में आज खड़े है। जनप्रतिनिधियों और नगर परिषद के बीच बिगड़े तालमेल का खामियाजा डेढ़ लाख की आबादी को भुगतना पड़ रहा है। पिछले पांच माह से शहर में विकास कार्य बंद है। हर तरफ अव्यवस्थाओं का आलम है। चुनाव के समय तो पार्षदों ने भी वादों की झड़ी लगा दी थी, कई नए सपने दिखाए, लेकिन अब जब जनता मुसीबत में है, उनके दर्द को सुनने के लिए कोई तैयार नहीं है। नए बोर्ड गठन के ढाई माह बाद भी शहर में एक भी काम नहीं हुआ है। हालात ये है कि शहर की सूरत बदहाल होती जा रही है। जनता ने कई उम्मीदों के साथ नया बोर्ड बनाया था, लेकिन विडंबना यह है कि बोर्ड के पास धनराशि नहीं है। गत बोर्ड के अंतिम समय में शहर में विकास के नाम अंधाधुंध करोड़ों रुपए खर्च कर दिए गए। अब देखना यह है कि क्या इस बोर्ड में शहर की बदसूरती का दाग धुल पाएगा या जनता बोर्ड की किस्मत को कोसती रहेगी।