मां संस्कृति की रक्षक : पालीवाल
वर्तमानभारतीय संस्कृत की रक्षक संवाहक मां है। माता यादे कुछ करने काे ठान ले तो पूरा करके रहती है। बच्चे की पहली शिक्षक मां होती है। यह बात आदर्श विद्या मंदिर हरसाणी में आयोजित मातृ सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता आदर्श शिक्षण समिति के सचिव पूनमचंद पालीवाल ने कही। उन्होंने कहा कि भारतीय शिक्षा पद्धति को विद्या भारती पुन विद्या मंदिर के माध्यम से स्थापित कर बालक के सर्वांगीण विकास में लगी है।
मुख्य अतिथि हरसाणी सरपंच मटका देवी ने विद्या भरती के कार्याें की सराहना की। संस्था प्रधान चेतनाचन्द बोहरा ने प्रतिवेदन एवं परिचय प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में माताओं ने भाग लिया। कार्यक्रम में विद्या मंदिर की पूर्व छात्राएं कंचन गोठी, कौशल्या खत्री ने भी विचार रखे। संचालन पपूसिंह भाटी ने किया तथा आभार प्रावि के प्रधानाचार्य तगाराम सुथार ने व्यक्त किया।
बाड़मेर. हरसाणीमें आयोजित मातृ शक्ति सम्मेलन में उपस्थित विद्यार्थी महिलाएं और अतिथि का स्वागत करती छात्राएं।