पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • उम्मीदवारों को भारी पड़ गया बैलेट पेपर से चुनाव

उम्मीदवारों को भारी पड़ गया बैलेट पेपर से चुनाव

6 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
हालही सम्पन्न पंचायतीराज चुनाव में ईवीएम की बजाय बैलेट पेपर से चुनाव करवाना करीब 12 से ज्यादा उम्मीदवारों को भारी पड़ गया। पंचायत समिति के कुल 43 में से 14 वार्ड ऐसे है, जहां मतदाताओं ने नोटा वोट एवं निरस्त हुए मतों का योग उस वार्ड में जीत के अंतर से ज्यादा है। इन 14 वार्डों में से 8 में भाजपा एवं 6 में कांग्रेस दूसरे स्थान पर रही थी।

निर्वाचन विभाग के आंकड़ों के अनुसार बस्सी क्षेत्र के कुल एक लाख 87 हजार 237 मतदाताओं में से एक लाख 21 हजार 405 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। गणना के दौरान इनमें से पांच हजार सात मत निरस्त पाए गए, वहीं 197 मतदाताओं ने नोटा का विकल्प चुना था। ऐसे में केवल एक लाख 16 हजार 201 मतदाताओं के मतों से ही विजेता का चयन हुआ। मगर इन पांच हजार 204 मतों की वजह से पंचायत समिति के कुल 43 में से 14 वार्डों में हार-जीत का गणित गड़ बडा़ गया।

तोशायद कुछ ओर होते नतीजे

अगरमतदान के दौरान ईवीएम का प्रयोग होता तो इतनी बडी़ संख्या में मत निरस्त नहीं हो पाते। ऐसे में संभवतया मतदान के नतीजे कुछ ओर ही होते। जिन 14 वार्डों में नोटा एवं निरस्त मतों का योग जीत के अंतर से अधिक है। उनमें से वार्ड 4, 10, 15, 19, 22, 28, 29 एवं 42 में भाजपा प्रत्याशी दूसरे स्थान पर रहे है। अगर इन वार्डों में ये मत निरस्त ना होने पर इन लोगों की जीत होती तो वर्तमान में भाजपा के सदस्यों की संख्या 23 (15+8) हो जाती, जो बहुमत से एक अधिक होती। इसी प्रकार वार्ड 1, 5, 12, 23, 34 तथा 40 में कांग्रेस के प्रत्याशी दूसरे स्थान पर रहे है। अगर इन वार्डों में मत निरस्त ना होते तो वर्तमान बोर्ड में कांग्रेस के सदस्यों की संख्या 27 (21+6) हो जाती जो बहुमत से 5 अधिक हो जाती।