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थोड़े से मुनाफे के लिए सब्जियों में जहर घोल रहे हैं िकसान

6 वर्ष पहले
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प्राकृतिक टेस्ट भी खत्म हो जाता है

^किसानजल्दी मुनाफा कमाने के चक्कर में इन केमिकल्स का उपयोग तो कर लेते हैं, मगर ये इन्सानों के लिए बेहद हानिकारक होते हैं। साथ इनके प्रयोग से फल-सब्जियां जल्दी पक तो जाती हैं, मगर उनका वास्तविक स्वाद भी खत्म सा हो जाता है। कन्हैयालालसारस्वत, सहायक कृषि अधिकारी

बढ़ रही हैं बीमारियां

^आजकलफल-सब्जियों में हानिकारक केमिकल्स की मात्रा बेहद खतरनाक स्तर तक बढ़ गई है, जिसकी वजह से कैंसर, हाइपरटेंशन, माइग्रेन, तंत्रिका तंत्र संबंधी बीमारियां भी पहले की तुलना में काफी बढ़ गई हैं। डॉ.विजेयता जैन, चिकित्सक

बस्सी. सब्जीमंडी में बिकने के लिए आई सब्जियां।

कमलकिशोर जैन | बस्सी

चंदरुपयों के लालच में क्षेत्र के किसान प्रतिबंधित रसायनों को प्रयोग कर सब्जियों को जल्दी पका रहे हैं। कम लागत पर मिल रहे ज्यादा मुनाफे को देखकर दूसरे किसान भी इनकी देखादेखी इन्ही का अनुसरण करने लगे हैं।

इन दिनों बाजार में रही अधिकतर सब्जियों को पकाने और उन्हें जल्दी बड़ा करने के लिए ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन एवं कार्बाइड गैस का प्रयोग किया जा रहा है। इनके प्रयोग से उनकी सब्जियां तो जल्द पक रही हैं, मगर लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ हो रहा है। इन रसायनों के प्रयोग से क्षेत्र के लोगों में कैंसर, तंत्रिका तंत्र संबंधी रोग एवं महिलाओं में प्रजनन संबंधी बीमारियां बढ़ने लगी हैं।

कैल्सियम कार्बाइड का प्रयोग प्रयोग मुख्य रूप से गैस वेल्डिंग में किया जाता है। इसके प्रयोग से इंसानों में माउथ अल्सर, गैस्ट्रिक ट्रबल एवं फूड पॉइजनिंगजैसी बीमारिया पैदा हो जाती हैं। इसी प्रकार गाय भैंसों से ज्यादा मात्रा में दूध प्राप्त करने एवं सब्जियों को जल्दी तैयार करने के लिए काम में लिया जाने वाला ऑक्सीटोसिन हार्मोन मुख्य रूप से महिलाओं में प्रजनन, सेक्सुअल एवं भावनात्मक व्यवहार को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। इसे हार्मोन ऑफ लव, कडल ड्रग, पानी आदि नामों से भी जाना जाता है। इसके प्रयोग से यूट्रिनल कैंसर, महिलाओं में मासिक धर्म की अनियमितता, बालो का झड़ना एवं आंखों की बीमारियां पैदा हो जाती हैं।

यूंसमझें कमाई का अर्थशास्त्र : अमूमनलौकी या कद्दू जैसी सब्जियों को पकने के लिए ढाई से तीन माह का समय चाहिए। ऐसे में एक सीजन में आम किसान एक बीघा खेती में सत्तर से अस्सी क्विंटल सब्जियां पैदा कर सकता है। मगर इन रसायनों के प्रयोग से वह इतने ही समय में तीन से चार गुना पैदावार ले लेता है। इससे उसका मुनाफा भी उसी अनुपात में बढ़ जाता है।

औरभी मिले हैं प्रतिबंधित रसायन : उपभोक्ताहितों में काम करने वाली संस्था कन्ज्यूमर वॉइस से करवाए गए सर्वे में दो माह में 193 सब्जियों के सैंपलों की लैब टेस्ट में उन्होंने पांच प्रतिबंधित पेस्टीसाइड्स की दैनिक उपयोग में आने वाली चीजों में मौजूदगी जांची। रिपोर्ट के अनुसार करेले में क्लोरोडिन, एन्ड्रिन तथा एथिल पैराथीन की मौजूदगी पाई गई। ये सभी पेस्टीसाइड्स इंसानों में तंत्रिका तंत्र संबंधी बीमारियों, माइग्रेन, सिरदर्द, जैसी बीमारियों की सबसे बड़ी वजह है। पालक में हेप्टाकोर पाया गया। इससे कैंसर, वजन में कमी जैसी बीमारियां पैदा होती हैं।