गृहकार्य की जांच भी नहीं करते अध्यापक
जिले के सरकारी स्कूलों में बच्चों को गृहकार्य तो दिया जाता है, लेकिन उसकी जांच नहीं की जाती है। इसका खुलासा शिक्षा संबलन अभियान के दूसरे चरण के तहत बुधवार को 107 स्कूलों के निरीक्षण में हुआ।
करीब तीन दर्जन से अधिक स्कूलों में सफाई व्यवस्था सही नहीं मिली तो कई स्कूलों में शैक्षिक स्तर कमजोर मिला। इधर प्रभारी सचिव की बैठक के कारण जिलास्तरीय अधिकारी स्कूलों का निरीक्षण नहीं कर सके। पहले दिन 126 स्कूलों का निरीक्षण होना था। प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक कुसुमलता वर्मा ने राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय नवीन सिटी का निरीक्षण किया। यहां बच्चों की उपस्थिति कम मिलने पर नाराजगी व्यक्त की। उपनिदेशक माशि कमलेश शर्मा ने भट्टपुरा यूपीएस का निरीक्षण किया। इसी प्रकार एडीईओ नत्थासिंह चतुर्वेदी ने बिरहरु, एडीईओ अनिल अग्रवाल ने टोहिला राप्रावि, एडीईओ भीमसिंह ने अटारी, रमसा के एडीपीसी लखनपालसिंह ने शाहपुर, एसडीओ अशोक गुप्ता नगला कल्याण, एसएसए के एडीपीसी रिखवचंद मित्तल ने बालिका यूपीएस बछामदी, कार्यक्रम सहायक मुकेश कुमार ने काछेरा बयाना रिपुसूदन सिंह ने बालिका यूपीएस नौनेरा का निरीक्षण किया। इसी प्रकार कामां में आठ, नगर में छह, डीग में 11, कुम्हेर में 9, सेवर में 10, नदबई में 10, वैर में आठ, बयाना में नौ, रूपवास में आठ भरतपुर में 28 स्कूलों का निरीक्षण किया।
^ पद तो खाली चल ही रहे हैं। बेहतर शिक्षा दिलाने के लिए प्रयास किया जाता है। निरीक्षण से स्कूलों की हकीकत निकल कर सामने आती है।
-कुसुमलतावर्मा, उपनिदेशकप्राशि
कार्रवाई बहुत पर नतीजा इस तरह सिफर
>इन अभियान में एक सेट फारमेट होता है। जिसे स्कूल में किसी शिक्षक को दे दिया जाता है जो प्रारूप भर देता है।
> अपनी रिपोर्ट में स्कूल की स्थिति को संतोषप्रद बताया जाता है, या फिर पढ़ाई को न्यून बताकर अपनी रिपोर्ट विभाग के लिए भेज दी जाती है।
> सभी अफसरों की रिपोर्ट को ऑनलाइन कर विभाग को भेजते हैं। जिला लेवल पर रिपोर्ट का कुछ अधिकारी मिलकर विश्लेषण करते हैं।
> कुछ समय बाद रिपोर्ट आती है। जिसमें इस जिले के बच्चे अंग्रेजी, हिंदी, गणित, विज्ञान में कमजोर हैं, इस पर ध्यान देने की जरूरत लिखा जाता है।