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दुर्लभ है मुमुक्षुत्व, मनुष्यत्व, महापुरुषत्व

7 वर्ष पहले
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नारायणआश्रम में अंतरराष्ट्रीय कथावाचक रमेश भाई ओझा ने कहा कि आज के युग में मोक्ष पाने की इच्छा, मनुष्य में मानवता बनाए रखना और संतों का साथ पाना सबसे दुर्लभ चीज है। भागवत कथा सुनने का सौभाग्य किसी को आसानी से नहीं मिलता, बल्कि संसार का पालन वाले स्वयं जगदीश सत्संग पाने वाले सौभाग्यशाली वैष्णवों का चयन करते हैं और कथा स्थल पर भिजवाते हैं। श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के पहले दिन भागवत को ज्ञान रूपी गंगा बताते हुए महात्म्य और संसार में प्रचार के बारे में विस्तार से बताया। सत्संग पुरुषार्थ का फल नहीं है, बल्कि केवल यह तो केवल भगवान की कृपा से मिलता है।

भाई श्री ने कहा कि झूठ, कपट, चोरी का सहारा लेकर किया जा रहा काम उसके लिए आगे जाकर बंधन का कारण बनने वाला है। संसार छोड़ते समय यह कुछ साथ नहीं जाने वाला। केवल उसके कर्म ही उसके साथ जाएंगे। कथा के दौरान सरल स्वभाव ना मन: कटूलाई, संतोष सदा ही..., चेतन ग्रंथी परि गाई..., एषु जीव अविनाशी, चेतन अमन सहज सुखरासी... आदि रामचरित मानस की चौपाइयां सुनाकर मंत्रमुग्ध कर दिया। कथा का संचालन रमेश बंसल ने किया। इस मौके पर विधायक शंकर सिंह रावत, चैन सुख हेड़ा, रिखबचंद खटोड़, आयोजक माणकचंद जिंदल, श्यामसुंदर जिंदल, रामेश्वर गोयल, राधेश्याम गोयल, भीमसेन अग्रवाल, ओमप्रकाश अग्रवाल, राजेंद्र, राधेश्याम गोयल, गोपाललाल बजाज आदि मौजूद थे।

ब्यावर. नारायणआश्रम में व्यासपीठ पर प्रवचन देते कथावाचक रमेश भाई ओझा तथा उपस्थित श्रद्धालु।