दाता तेरी भक्ति का सुख है निराला...
आर्यसमाज के 82वें वार्षिक उत्सव का समापन सोमवार को हर्षोल्लास के साथ देवयज्ञ, भजन उपदेश के साथ हुआ। आर्य समाज अध्यक्ष ओमप्रकाश काबरा ने बताया कि 26 सितंबर से शुरू हुए वार्षिकोत्सव के दौरान देवयज्ञ में यजमानों द्वारा वैदिक मंत्रों के साथ आहुतियां दी गई। इसके बाद उत्तरप्रदेश बिजनौर से पहुंचे भजनोपदेशक भीष्म आर्य ने दाता तेरी भक्ति का सुख है निराला..., अजब हैरान हूं भगवन, तुझे क्या रिझाऊ मैं..., प्रेम बनकर प्रेम से ईश्वर के गुण गाया कर...जैसे भजन प्रस्तुत किए।
समाज मंत्री सत्यप्रकाश झंवर ने बताया कि औरेया (उत्तरप्रदेश) के आचार्य राजदेव शास्त्री ने वेदोपदेश में बताया कि वही घर आनंद का सदन है जिस घर में यज्ञशाला है। यदि धन पाप की कमाई से आएगा तो वह कभी भी सुख देने वाला नहीं होगा। जनेऊ (यज्ञोपवित) हमारी संस्कृति का प्रतिक है। जिसे हर आर्य को धारण करना चाहिए। देश धर्म, संस्कृति की रक्षा के लिए युवा वर्ग को शरीर को बलवान स्वस्थ रखने के लिए व्यायाम आवश्यक है।
उपमंत्री अभयदेव धूत ने वार्षिकोत्सव में सहयोग करने वाले, कार्यक्रम संयोजक, सहयोगी, नगरवासियों, आर्य सभासदों शिक्षण संस्थाओं के सभी कर्मचारियों विद्यालय परिवार की छात्राओं और अतिथियों का आभार जताया। समारोह में प्रधान ओमप्रकाश काबरा, उपप्रधान हरीनारायण मालानी, इंद्रदेव आर्य, मंत्री सत्यप्रकाश झंवर, हरिदेव आर्य, दीवान सिंह आर्य, भूदेव आर्य, सीताराम चौहान, राजेंद्र काबरा, वैभव तोषनीवाल, महेश मालू, विनायक माहेश्वरी, सुखदेव आर्य सहित अन्य लोग मौजूद थे।