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प्रेम के अधीन है भगवान

7 वर्ष पहले
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ब्यावर|स्थानीय रामद्वारामें आयोजित रूक्मणी आख्यान के दौरान मंगलवार को संत रामशरण शास्त्री ने कहा कि कि रुक्मणी ने प्रभु श्रीकृष्ण को लिखा कि प्रभु मेरी विनती सुने और अपनी कृपा की बौछार करके तुरंत कुडंनपुर पधारे ताकि मेरा उद्धार हो सके। रुक्मणी के गुणों का वर्णन सुनकर भगवान श्रीकृष्ण तैयारी कर जाने लगे। इस दौरान जब उन्हें ब्राह्मण ने तिलक लगाकर र| जड़ित अंगूठी भेंट की तो उसे देखते ही श्रीकृष्ण ने उसे पहचान लिया। उन्होंने कहा कि ये अंगूठी तो मैने त्रेतायुग में हनुमान जी के साथ सीताजी को भिजवाई थी। संतश्री ने फरमाया कि जब भगवान श्रीकृष्ण ने रुक्मणी का पत्र बेगा पधारों सांवरा कठिन बनी है, आप बिना म्हारो कौन धनी है पढ़ा तो उनकी भी आंखों से आंसूओं की धारा बह चली।