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134 साल पुराना माल गोदाम होगा ध्वस्त

7 वर्ष पहले
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1878 में शुरू हुआ था निर्माण

बॉम्बेबड़ौदा एंड सेंट्रल रेलवे कंपनी ने 1878 में रेलवे स्टेशन और माल गोदाम का निर्माण शुरू किया। दो साल के बाद 1880 में मालगोदाम और रेलवे स्टेशन बन कर तैयार हो गया। इतिहासकार वासुदेव मंगल के अनुसार सन 1880 में जब ब्यावर में रेलवे लाइन की स्थापना की गई, उसी दौरान लाइन डालने के साथ ही रसद और सैन्य सामग्री को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से इंजीनियरों ने रेलवे स्टेशन के समीप ही माल गोदाम का निर्माण किया। अंग्रेजों को नाकों चने चबवाने वाले स्वतंत्रता सेनानियों से रसद और सैन्य सामग्री को बचाने के लिए अंग्रेज इंजीनियरों ने माल गोदाम की मजबूती पर खास ध्यान दिया। अब डीएफसीसी की जद में आने के कारण इसे तोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। इसके साथ ही कुछ सालों पहले तक रेलवे स्टेशन की पहचान रही केबिन भी डीएफसीसी की जद में गई। रेलवे ने उसे भी चिन्हित कर लिया है। जल्द ही उसे भी धाराशायी कर दिया जाएगा।

ब्यावर. सन 1880 में निर्मित माल गोदाम जो जल्द ही धाराशाही हो जाएगा।

मनीष शर्मा . ब्यावर

वेस्टर्नडेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के रेवाड़ी से पालनपुर तक 360 किलोमीटर डबल ट्रैक की जद में आने के कारण ब्यावर में माल गोदाम और केबिन को जल्द ही धाराशायी किया जाएगा।

इस संबंध में एक जापानी कंपनी ने भारतीय रेल के साथ मिलकर डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की कवायद शुरू कर दी है। इसके लिए जापानी कंपनी को करोड़ाें रुपए का टेंडर दिया गया है। ब्यावर स्टेशन के समीप कंपनी ने कार्य शुरू करते हुए आरपीएफ थाने के भवन के फाउंडेशन के लिए खुदाई करना शुरू कर दिया।

थानाभवन का निर्माण शुरू

डीएफसीके जद में आने के कारण रेलवे सुरक्षा बल का थाना भी टूटेगा। थाने को नए भवन में शिफ्ट किया जाएगा। इस कारण रेलवे स्टेशन परिसर में आरपीएफ थाने के नए भवन का निर्माण भी शुरू कर दिया गया।

क्याहै डीएफसीसी योजना…

भारतीयरेल की सबसे बड़ी और महत्वाकांक्षी योजना का नाम है डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर। हरियाणा के रेवाड़ी से गुजरात के पालनपुर तक मालवाहक ट्रेनों के लिए बिछाया जा रहा रेलवे डबल ट्रैक को जापान की कंपनी निर्मित कर रही है। कंपनी के द्वारा निर्मित करीब 600 किलोमीटर का ये डबल ट्रैक पूर्णतया ऑटोमेटिक होगा। वर्तमान में जहां मालवाहक ट्रेन करीब 20 से 30 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से दौड़ती हैं तो वहीं