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5 हजार की स्कॉलरशिप अटकी

7 वर्ष पहले
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गरीबतबके के होनहार बच्चों को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की ओर से दी जाने वाली उत्तर मैट्रिक छात्रवृत्ति मिलने को लेकर संशय बना हुआ है। विभागीय स्तर पर छात्रवृत्ति उपलब्ध कराने संबंधी नियमों में फेरबदल करने से ब्यावर क्षेत्र की स्कूलों कॉलेजों में पढ़ने वाले करीब 5 हजार से ज्यादा बच्चों की छात्रवृत्ति इस बार अधरझूल में लटक चुकी है। हालात यह है कि महकमे ने दो महीने पहले बदले गए नियमों का प्रचार-प्रसार जानकारी उपलब्ध नहीं करवाने से स्कूलों में पात्र करीब चार हजार और कॉलेज के 1 हजार अधिक स्टूडेंट को आवेदन करने के बावजूद अपनी छात्रवृत्ति से वंचित होना पड़ेगा।

जारीहो चुका है आदेश

उत्तरमैट्रिक छात्रवृत्ति पिछले साल तक अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग की सभी कैटेगरी को दी जा रही थी। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने गत 25 जुलाई को आदेश जारी करके नवीन सत्र से अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति के अलावा केवल छह वर्गों को पात्र माना है। लेकिन जानकारी के अभाव में विद्यार्थी ऑनलाइन आवेदन करते रहे और मूल प्रतियां एसडी कॉलेज में जमा कराते रहे। फिर भी उन्हें छात्रवृित्त के बारे में जानकारी नहीं मिल पाई।

ओबीसीमें केवल 6 कैटेगरी शामिल

विभागके आदेशों के मुताबिक केवल ओबीसी की छह कैटेगरी के विद्यार्थियों को ही शामिल किया गया है। अन्य पिछड़ा वर्ग में आने वाले बीपीएल, निशक्तजन, विधवा, तलाक शुदा और परित्यक्ता विधवा के बच्चे ही आवेदन के लिए मान्य होंगे। इसके अलावा आवेदन स्वीकार्य नहीं होंगे। विभाग ने यह आदेश 2 महीने पहले जारी कर दिया था।

प्रमाण पत्र बनवाने में खर्च हुए 400 रुपए

सनातनधर्म राजकीय महाविद्यालय छात्रवृत्ति आवेदन करने वाले अधिकतर विद्यार्थियों में ज्यादातर बाहर के हैं। पाली, राजसमंद, नागौर समेत अजमेर जिले के पेरा-फेरी गांवों के हैं। छात्रवृत्ति आवेदन की खानापूर्ति के लिए विद्यार्थियों को गांवों में जाकर दस्तावेज पूरे कराने पड़े। इस कागजी कार्रवाई में विद्यार्थियों को तीन-चार सौ रुपए का खर्चा भी हुआ है। इसके बाद उन्हें छात्रवृत्ति नहीं मिलने का पता चला तो छात्रवृत्ति पाने का सपना टूट गया है।

^पिछले साल आवेदन करने पर 3200 रुपए मिले थे। महीनेभर पहले छात्रवृत्ति के लिए आवेदन किया। अब अन्य पिछड़ा वर्ग की छात्रवृत्ति कैटेगरी से कई वर्गों को