कर भला तो हो भला, यही है जीने की कला
ब्यावर| आर्यसमाज ब्यावर के वार्षिकोत्सव के मौके पर आचार्य राजदेव शास्त्री ने उपदेश देते हुए कहा कि यज्ञ से मनुष्य जीवन में सफलता पा सकता है। यज्ञ करने से वायुमंडल में सकारात्मकता फैलकर शुद्धि भी होती है। उन्होंने कहा कि सुखद जीवन के लिए माता-पिता की सेवा करनी चाहिए। इस मौके पर हमें सबसे प्यारा है वैदिक धर्म..., कर भला हो भला, अंत भला है, बस यही जीने की कला है... जैसे अनेक भजनों की प्रस्तुतियां दी गई।
आर्य समाज ब्यावर के 92वें वार्षिकोत्सव के अवसर पर चल रहे कार्यक्रमों के तीसरे दिन आर्य समाज मंदिर में सुबह यज्ञ, भजन उपदेश एवं रात्रि में भजन उपदेश कार्यक्रम हुए। रविवार सुबह देवयज्ञ में यज्ञमानों ने वेदमंत्रों के साथ आहूतियां दी। तत्पश्चात अभिनंदन समारोह हुआ। इसमें नई दिल्ली से पधारे स्वामी प्रणवानंद सरस्वती का स्वागत सम्मान किया गया। आर्य समाज के प्रधान ओमप्रकाश काबरा, उपप्रधान हरिनारायण मालानी, इंद्रदेव आर्य, मंत्री सत्यप्रकाश झंवर, सत्यनारायण मालानी, विनायक माहेश्वरी, महेश मालू, भूदेव आर्य, दीवान सिंह आर्य, जयनारायण हेड़ा, लालाराम पहलवान, राजदेव शास्त्री, चंपादेवी तोषनीवाल, शारदा देवी ने स्वामी जी का माल्यार्पण कर अभिनंदन किया। अभिनंदन पत्र का वाचन सुनील शास्त्री ने किया। आर्य समाज के प्रधान मंत्री ने अभिनंदन पत्र भेंट किया।
अभिनंदन पत्र का वाचन सुनील शास्त्री ने किया। दीवान सिंह आर्य सीताराम शर्मा ने श्रीफल भेंट किया। हरिदेव आर्य, कैलाश छीपा ने शॉल ओढ़ाकर अभिनंदन किया। उपमंत्री अभय देव आर्य, वैभव तोषनीवाल ने बताया कि अभिनंदन समारोह के पश्चात भजनोपदेशक भीष्म आर्य द्वारा सारगर्भित भजनों की प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम में राजेंद्र काबरा, संजय बाहेती, रामेश्वर भूतड़ा, देवदत्त कुमावत, ओमप्रकाश नवाल, श्रृतिशील झंवर, सूर्यकांत चौधरी, सुखदेव आर्य समेत अनेक सदस्य मौजूद थे।
ब्यावर. आर्यसमाज में रविवार को आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित सदस्य।
ब्यावर. स्वामीप्रणवानंद का स्वागत करते पदाधिकारी।