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कोताही में फंसे 1.34 करोड़, वसूली बनी चुनौती
पूरी लीज राशि लिए बिना ही जारी कर दिए सैकड़ों पट्टे
राजेशकुमार शर्मा| ब्यावर
नगरपरिषद ने पट्टों पर लीज दर बढ़ जाने के बावजूद जयपुर से आदेश नहीं मिलने की अाड़ में तीन साल तक भूखंडधारियों से नई दर से वसूली नहीं की। परिषद की यह लकीर पीटने की आदत सरकारी खजाने को 1.34 करोड़ रुपए की चपत लगा गई। अॉडिट पैरा में रिकवरी के आदेश दिए गए हैं लेकिन पट्टेधारियों से इसे वसूलना आसान नहीं होगा। सात साल पहले की गलती का खामियाजा सिर्फ परिषद के वर्तमान कर्मचारियों को भुगतना होगा बल्कि कम राशि वाले भूखंड स्वामियों को बेवजह वसूली अभियान का शिकार होना पड़ेगा। परिषद लीज धारियों को बकाया नहीं होने का प्रमाण पत्र दे चुकी है और कई भूखंडों का बेचान होने के बाद स्वामियों में बदलाव होने से इस राशि को वसूल पाने की संभावना के बराबर जताई जा रही है। ऐसे में तत्कालीन संबंधित अधिकारियों कर्मचारियों से भी इस रकम की वसूली संबंधी कार्यवाही होने के आसार है।
^नगर परिषद से पूर्व में जारी हुए पट्टों में कम लीज राशि जमा की गई। जबकि सरकार ने राशि बढ़ाने के आदेश उस समय जारी कर दिए थे। इस वजह से ऑडिट पैरा में 1.34 करोड़ रुपए बकाया निकल गए। अब इस रकम की वसूली के लिए नोटिस देने के बारे में विचार कर रहे हैं। जिससे भूखंड स्वामियों से बकाया राशि वसूली जा सके। मुरारीलालवर्मा, आयुक्त
किस पर गिरेगी गाज, कौन होगा वसूली का शिकार
>पिछले सात सालों में 858 में से कई भूखंड हस्तांतरित हो जाने से वर्तमान में मालिकाना हक रखने वाले भूखंड स्वामी इस वसूली की जद में नहीं पाएंगे। जिससे वे रकम चुकाने में विधिक तौर पर अपनी असमर्थता जताएंगे।
> लीज राशि जमा होने के साथ ही नगर परिषद द्वारा पट्टे के साथ दिया गया ‘नो-ड्यूज’ प्रमाणपत्र के आधार पर नगर परिषद को वर्तमान में लीज राशि के पेटे भूखंड स्वामियों से किसी भी प्रकार की वसूली करने का विधिक रूप से अधिकार नहीं होने से समस्या का सामना करना होगा।
> तत्कालीन कर्मचारियों अफसरों में बदलाव होने की वजह से वर्तमान में कार्यरत कर्मचारी अधिकारी से भी इस रकम की वसूली किया जाना न्यायसंगत नहीं होगा।