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कभी ‘उदास’ नहीं होता भगवान का ‘दास’

7 वर्ष पहले
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अनंता-अनंत,ब्रह्मांड के नायक भगवान की भक्ति करने वाला ‘दास’ कभी ‘उदास’ नहीं होता। जिंदगी में आने वाले सुख-दुख को भगवान की मर्जी मानने वाले का प्रत्येक विधान मंगलमय बन जाता है। नारायण आश्रम परिसर में सजे भव्य पांडाल में व्यासपीठ पर विराजे अंतरराष्ट्रीय संत रमेश भाई ओझा ‘भाईश्री’ की वाणी से श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ और समधुर भजन-सत्संग का अनूठा संगम देखने को मिला। कथास्थल में श्रोताओं की बैठक व्यवस्था, एलईडी, प्लाजमा टीवी और संगीत के वाद्य यंत्र कथा-रस भगवान श्रीकृष्ण की सम्पूर्णता का बखान कर रहे थे। कथा से पूर्व तहसीलदार मदनलाल जीनगर, सभापति बबीता चौहान, उपसभापति सुनील मूंदड़ा, आयुक्त मुरारीलाल वर्मा, उमा खंडेलवाल, कांता ग्वाला, भाजपा महिला मोर्चा महामंत्री साधना सारस्वत, संगीता द्विवेदी, डॉ. अमिता बिड़ला, मुकुंददास राठी, एल.एन. डागा, ओम मंगल, किशन बंसल, मोहनलाल अग्रवाल, सुनील शर्मा, चंपालाल गोयल, धरणीधर गर्ग, मोतीलाल मित्तल, कमल जिंदल, अजय, नितेश, मुकेश गोयल, मृदुल गर्ग, शाश्वत गर्ग, सुखदेव बंसल, रमेश मास्टर, तरूण अग्रवाल ने भाईश्री का स्वागत किया।

ब्यावर. नारायणआश्रम में श्रीमद् भागवत कथा में उपस्थित श्रद्धालु।

मेरे तो आधार, सीताराम के चरण कमल

तेरी मेहरबानी का है बोझ इतना... इसलिए सामने नहीं आते भगवान

सृष्टिकी रचना कर मनुष्यत्व प्रदान करने वाले ईश्वर का प्राणीमात्र पर ढेरों उपकार है। अनंत-अनंत उपकार करने वाले भगवान संकोच से मनुष्य के सामने नहीं आते है। किसी व्यक्ति से रुपए मांगने वाला संकोच के कारण सामने नहीं आता, वैसे ही जीवों के दाता भी व्यक्ति के सामने आकर अपना अधिकार नहीं जताते। कथा के दौरान भाईश्री ने तेरी-मेहरबानी का है बोझ इतना.. मैं तो उठाने के काबिल नहीं हूं.... भजन गाकर इसका महत्व समझाया।

वियोगशास्त्र है भागवत

भागवतगीता का सभी धर्मों द्वारा इसका सम्मान किया जाता है और आज से नहीं युग-युग से गीता का महात्म्य और प्रभाव सर्वमान्य सर्वलौकिक है। भाईश्री ने गीता को राष्ट्रीय ग्र्रंथ घोषित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि गीता योग शास्त्र, रामायण प्रयोग शास्त्र तथा भागवत वियोग शास्त्र हैं। वहीं संस्कृत भाषा सभी भाषाओं की जननी है।

भाईश्री ने भगवान श्रीकृष्ण की करूणा के बारे में बताते हुए कहा कि उन्हें प्रेम के सिवाय कुछ नहीं नजर नहीं आता। सिर