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प्रभु करते हैं शरणागत की रक्षा

7 वर्ष पहले
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परिवार में शांति के लिए नहीं होना चाहिए कलह

भास्करन्यूज| ब्यावर

संतरामशरण महाराज ने कहा कि विवाह, प्रीत बैर बराबर वालों के साथ होने चाहिए। महाराज रविवार को अजमेरी गेट बाहर स्थित रामद्वारा में आयोजित धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे।उन्होंने रूक्मणी विवाह प्रसंग पर चर्चा करते हुए कहा कि उनके पिता भीष्मक उनका विवाह द्वारकाधीश के साथ जबकि भाई रूक्मैया शिशुपाल के साथ करना चाहते थे। रूक्मणी की मां भी शिशुपाल के पक्ष में थी, लेकिन रूक्मणी भगवान से ही विवाह करना चाहती थी।

गृहस्थ तभी सुखी रह सकता है जबकि पति प|ी एकमत हो। परिवार के सभी सदस्यों को मन मिला हुआ होना चाहिए। परिवार में समन्वय अनिवार्य है। पिता पुत्र की बहस सुनकर रूक्मणी के नेत्रों में अश्रुधारा बह चली। प्रभु से विनती की तो प्रभु दर्शन देने सरोवर के समीप पहुंच गए। भगवान तो आत्मा की पुकान समझते हैं। महाराज ने कहा कि प्रभु शरणागत की रक्षा करते हैं। बस शर्त मात्र यह है कि जो उन्हें आत्मा से पुकारता है तो वह दौड़े चले आते हैं। महाराज ने मनुष्य जीवन को व्यर्थ के कार्यों में लगाकर परोपकार सद्कार्यों में लगाकर अपनी आत्मउन्नति का संदेश दिया। धर्मसभा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।

संत रामशरण महाराज।