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ज्वालामुखी माता के दरबार में उमड़ रही श्रद्धालुओं की आस्था

7 वर्ष पहले
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524मीटर ऊंचा ज्वाला पहाड़

350 साल पहले मूर्ति प्राकट्य

275 सीढ़ियों से पहुंचते हैं भक्त

169 साल पहले सौंपा ताम्रपत्र

ज्वालामुखी माता का दरबार ब्यावर शहर से पांच किलोमीटर दूर पहाड़ पर स्थित है। करीब 350 वर्ष पूर्व यहां पहाड़ पर माता की प्रतिमा का प्राकट्य हुआ। पहाड़ का नाम ज्वाला होने से मां को ज्वालामुखी पुकारा जाने लगा। रियासतकाल में यहां पूजा शुरू हुई तो यह मंदिर भक्तों की आस्था का केंद्र बन गया। सन 1845 में अंग्रेजी हुकूमत के वक्त ब्रिटिश सरकार द्वारा नियुक्त प्रशासक कर्नल डिक्सन ने मंदिर के तत्कालीन पुजारी को उर्दू में लिखा ताम्रपत्र सौंपा। अब यह मंदिर देवस्थान विभाग में पंजीकृत हैं। 524 मीटर ऊंचे इस पहाड़ पर बने मंदिर तक पहुंचने के लिए भक्तों को 275 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। मंदिर की पूजा महंत मधुसूदन दाधीच कर रहे हैं। चैत्र शारदीय नवरात्र में यहां भक्तों का सैलाब उमड़ता है। भक्त कई किलोमीटर का सफर नंगे पैर तय कर यहां पहुंचते हैं। फोटो| अमित सारस्वत

350 साल पहले हुआ था माता का प्राकट्य