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मेगारोड से गायब ‘कैट आई’ वाहनों पर नजर आई

7 वर्ष पहले
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नगरपरिषद की ओर से निजी सहभागिता के तहत बनवाई गए मेगारोड पर वाहन चालकों की सुविधा के लिए लगाई गई ‘कैट आई’ कुछ दिनों बाद ही वाहनों पर नजर आने लगी।

मेगारोड का काम पूरा होने के बाद टू-लेन की लाईनिंग पर लगी ‘केट आई’ को लगे एक हफ्ता भी नहीं बीता था कि वे मौके से गायब होने लगी। इसको लेकर संबंधित ठेकेदार का कहना था कि सड़क पर ‘कैट आई’ एक विशेष केमिकल से चिपकाई गई थी। जो वाहनों का दबाव सह सकती थी। जहां से ‘कैट आई’ गायब हुई वहां का मौका-मुआयना भी किया गया। ऐसा लगता है जैसे किसी ने जबरन सड़क से ‘कैट आई’ को उखाड़ा हो। ऐसे में उन्होंने मेगारोड से गायब हुई कैट आई की जगह नई कैट आई मंगवाकर फिर से लगवाई।

इधर बुधवार दोपहर रेलवे फाटक पर खड़ी एक पिकअप के पीछे ‘कैट आई’ नजर आई। ठेकेदार सविंदर जीत सिंह के मुताबिक एक कैट आई की कीमत करीब 300 रुपए है। ऐसे में यह संभव नहीं कि वाहन के पीछे रिफलेक्टर की जगह कोई वाहन मालिक रिफ्लेक्टर से ज्यादा कीमत की कैट आई लगवाएगा। ऐसे में यह आशंका जताई जा रही है कि मेगारोड से गायब हुई कैट आई या तो वाहनों पर लगाई गई या किसी ने उन्हें जान-बूझकर सड़क से उखाड़ा था।

मालूम हो कि रात में हाइवे पर लेन को विभाजित करने के लिए कैट आई अहम भूमिका निभाती है। ऐसे में मेगारोड की सुंदरता बढ़ाने और वाहन चालकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मेगारोड पर सिंतबर के अंतिम सप्ताह में कैट आई लगी थी। जो रात में टू-लेन पर होने वाली सफेद लाईनिंग पर लगी होने से वाहनों की हैड लाईट की रोशनी पड़ते ही चमकने लगती है। जिससे वाहन चालक को मेगारोड पर टू-लेन आसानी से दिखाई दे जाती है। लगने के महज एक सप्ताह बाद ही कई जगह से कैट आई गायब होने लगी।

ठेकेदार का कहना है कि हाइवे पर जिस केमिकल से कैट आई को चिपकाया जाता है उसी तर्ज पर मेगारोड पर भी कैट आई को चिपकाया गया है। जो वाहनों का दबाव आसानी से झेल सकती है। इसे जब तक जबरन किसी औजार से उखाड़ा जाए यह हटेगी नहीं।

ब्यावर. रेलवेफाटक बाहर खड़े एक वाहन के पीछे लगी कैट आई।

ब्यावर. मेगारोडपर लगी कैट आई जो कई जगह से अब गायब हो गई हैं।