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‘सुनी पुकार गुरुनानक जग माहीं पठाया...’

7 वर्ष पहले
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सिखधर्म के पहले गुरु नानक देव की 545वीं जयंती गुरुवार को श्रद्धा उल्लास के साथ मनाई गई। गुरुद्वारे में विशेष दीवान सजाया गया तथा तीन दिन तक चले गुरु ग्रंथ साहब के अखंड पाठ के भोग के बाद सुखमणी साहिब का पाठ किया गया। गुरुद्वारे में चले लंगर में सिख संगत अन्य लोगाें ने श्रद्धा के साथ भाग लिया। गुरुद्धारे को आकर्षक रोशनियों से सजाया गया।

गुरु नानक जयंती पर गत 4 नवंबर से चल रहा अखंड पाठ गुरुवार सुबह 10 बजे संपन्न हुआ। इसके पश्चात निशान साहिब को नए वस्त्र चढ़ाकर सेवा की गई। पंजाब से आए रागी जत्थे मनदीप कौर लुधियाना की ओर से सत्संग हुआ। सत्संग में अव्वल अल्है नूर उपाया, कुदरत के सब बंदे..., जग तारण गुरुनानक आया..., सतगुरु नानक प्रकटया... , मानस की जात सबे एकै पहचाने... जैसे शबद-कीर्तन के माध्यम से गुरुवाणी का महिमा सुनाई। बलविंदर सिंह द्वारा ग्रंथजी की हुजूरी की गई। दोपहर में कीर्तन का समापन हुआ। इसके पश्चात गुरुद्वारा परिसर में लंगर-प्रसाद चखा। गुरुद्वारा परिसर में सबील की भी व्यवस्था रखी गई। इस मौके पर रागी जत्थे द्वारा गुरूनानक देवजी की जीवन के बारे में भी बताया गया। गुरूद्वारा प्रबंधन कमेटी के अध्यक्ष त्रिलोचन सिंह, सचिव साहिब सिंह, जसबीर सिंह, हरबन सिंह, जगजीत सिंह अन्य संगत ने सेवाएं दी। गुरूद्वारा परिसर की लाइटिंग गुब्बारों से विशेष सजावट की गई। जयंती पर गुरूद्वारा परिसर में लंगर प्रसाद का आयोजन हुआ।

गुरू की शिक्षा-संदेश को किया याद

ब्यावर. गुरूनानक जयंती पर गुरूद्वारे में संगत करता लुधियाना का रागी जत्था।

ब्यावर. गुरुनानक जयंती पर गुरूद्वारे में अरदास करते समाज के लोग।

ब्यावर. गुरूनानक जयंती पर गुरूद्वारे में लंगर-प्रसाद चखते लोग।