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सत्संग से विवेक को करें जाग्रत

7 वर्ष पहले
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ब्यावर | उपप्रवर्तकपंडित र| प्रदीप मुनि मसा ने कहा कि संत दर्शन से मनुष्य का बेड़ा पार हो जाता है। सत्संग से व्यक्ति का विवेक जाग्रत हो जाता है। संतों की वाणी सुनने से अच्छे भाव जाग्रत होते है। वाणी में मधुरता होनी चाहिए, इससे किसी को कष्ट नहीं पहुंचेगा।

कुंदन भवन में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए उपप्रवर्तक डॉ. सुभाष मुनि ने कहा कि लोकाशाह ने अपनी पहचान खोते जा रहे जैन समाज को पुर्नगठित प्राण फूंकने का कार्य किया। चातुर्मास के अंतिम दिवस पर कहा कि समाज को संगठित कर विकास की ओर ले जाने का प्रयास करना चाहिए। महाराज ने श्री ने संत-समुदाय की ओर से उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं से क्षमा वीरस्य भूषणम् का संदेश दिया गया। विदाई समारोह पर संघ अध्यक्ष देवराज लोढ़ा ने चातुर्मास अवधि में किसी प्रकार की भूल के लिए क्षमा मांगी। अमरचंद मोदी, महेंद्र सांखला, पारसमल श्रीमाल ने भी विचार व्यक्त किए। जैन दिवाकर महिला मंडल अध्यक्ष सुशील लोढ़ा ने मन, वचन काया से क्षमा याचना की।

मंजूला जांगड़ा, मैना बोहरा, प्रियंकर चौरडिया एवं महिला मंडल ने विदाई गीत प्रस्तुत किया। इस मौके तेजराज हलवाई, वी. पार्थो., श्रीकिशन, जयनारायण, सुरेंद्र भूपेंद्र का माल्यार्पण कर स्वागत किया गया। उषा बाबेल को दिवाकर महिला मंडल की सदस्यों ने अध्ययन-अध्यापन के लिए माल्यार्पण कर स्वागत किया। संघ अध्यक्ष देवराज लोढ़ा ने बताया कि शुक्रवार को सुबह 9.15 बजे मुनिवर कुंदन भवन में प्रस्थान कर उदयपुर रोड स्थित छल्लाणीजी की बगीची में पहुंचेंगे। संघ मंत्री पारसमल श्रीमाल ने धर्मसभा का संचालन किया।