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खस्ताहाल एंबुलेंस बचाएंगी इमर्जेंसी में मरीजों की जान!
आपातस्थिति में फंसे लोगाें को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए संचालित एंबुलेंस सेवा 108 का लक्ष्य मरीज को अस्पताल पहुंचने तक प्राथमिक उपचार करना भी है लेकिन यहां एंबुलेंस से जीवन रक्षक सेवाओं की उम्मीद करना बेकार है। पिछले एक साल से इसमें लगे 35 से अधिक जीवनरक्षक उपकरण खराब पड़े हैं। लेकिन इसको लेकर ना तो सरकार गंभीर है और ना ही सेवा को संचलित करने वाली संस्था जीवीके ईएमआरआई। ऐसे में लापरवाही का खामियाजा मरीजों को उठाना पड़ सकता है। इमरजेंसी वाले गंभीर लोगों को भगवान भरोसे ही अस्पताल पहुंचाया जा रहा है। इंस्टूमेंट खराब होने के कारण हादसे में घायल होने वाले लोगों को अस्पताल के रास्ते में आवश्यक लाइफ सेविंग सर्विस नहीं मिल पा रही है। ऐसे में उन लोगों पर अस्पताल तक सुरक्षित नहीं पहुंचने का खतरा मंडरा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अफसर इसे कंपनी की जिम्मेदारी बता कर रहे हैं तो इधर कंपनी प्रतिनिधि जल्द समाधान होने की बात कह रहे है।
ऑक्सीजनसिस्टम, पल्स ऑक्सोमीटर समेत 35 से ज्यादा उपकरण खराब : ब्यावरसमेत जवाजा और टॉडगढ में तैनात 108 एंबुलेंस के कई उपकरण खराब पड़े है। एंबुलेंस में ऑक्सीजन सिस्टम, पल्स ऑक्सोमीटर, ग्लुकोमीटर, थर्मामीटर, सक्शन मशीन, नीबुलाइजर मशीन, ब्लड पे्रशर इंस्ट्रूमेंट, हेंड वॉश, ब्रेक, स्टेयरिंग, स्ट्रेचर, वॉयरलैस समेत 35 से ज्यादा उपकरण खराब है। एंबुलेंस की पेशेंट केबिन में तो फर्श से लेकर पंखे और लाइट तक क्षतिग्रस्त हो चुकी है। गाड़ी का सायरन खराब होने से सड़क पर हादसे की संभावना बनी रहती है। लाइट की सप्लाई नहीं होने के कारण सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण किसी काम के नहीं है।
हो जानी चाहिए रिटायर...
एनआरएचएमके नियमानुसार ऐसी एंबुलेंस जिन्हें पांच साल या उससे ज्यादा समय हो गया अथवा जो 2 लाख 66 हजार किलोमीटर से ज्यादा चल चुकी है उन्हें रिटायर कर दिया जाना चाहिए। ब्यावर में तैनात एंबुलेंस को करीब 7 साल हो गए और ढाई लाख किलोमीटर से ज्यादा दौड़ चुकी है। ऐसे में नियमानुसार एंबुलेंस को कब का रिटायर कर दिया जाना चाहिए।
कितनेउपयोगी है उपकरण
वैक्यूमसक्शन मशीन : येगले में जमा खून, बलगम आदि को निकालकर श्वसन नली को साफ करता है। जिससे सांस लेने में तकलीफ ना हो।
पल्सऑक्सीमीटर : इससेब्लड प्रेशर, पल्स, धडकन, सांस की रफ्तार का पता लगाया जाता है।
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