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ब्यावर जेल में हथियार पहुंचाना बेहद आसान

7 वर्ष पहले
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बंदियोंमें वर्चस्व को लेकर कई बार झगड़े होने, बंदी के फरार होने और अन्य वारदातों के बावजूद ब्यावर सब जेल की सुरक्षा को लेकर प्रशासन बेपरवाह बना हुआ है। 23 साल पुरानी इस सब जेल की क्षमता 90 बंदियों की है लेकिन यहां वर्तमान में 110 बंदी विचाराधीन है। जेल और बंदियों की सुरक्षा को लेकर जेल प्रबंधन की बेपरवाही का आलम यह है कि क्षमता से अधिक बंदी होने के बावजूद जेल की सुरक्षा का जिम्मा एक प्रवीक्षाधीन जेलर और नियुक्त पोस्ट से अाधे प्रहरियों के भरोसे है। मुख्य जेल की दीवार मात्र 15 फीट ऊंची है, जिस पर 3 फीट तार फेंसिंग है। जिससे बंदियों तक ना सिर्फ मोबाइल पहुंचाए जाते हैं, बल्कि हथियार भी आसानी से पहुंचाए जाने की संभावना बनी रहती है।

बंदियों में हो चुकी है गैंगवार

पिछलेसाल ही नवंबर में सब जेल में बंदियों के दो गुटों में जमकर संघर्ष हो गया। दो गुटों के बीच वर्चस्व को लेकर हुए संघर्ष में कई बंदी घायल हो गए। उस दौरान बंदियों को अलग करने गए दो प्रहरियों पर भी बंदियों ने हमला कर दिया। इसकी जानकारी होने पर जेलर पारसमल जांगिड़ और अन्य जाब्ते ने बल प्रयोग कर बंदियों को अलग किया।

^सब जेल की सुरक्षा में कोई कोताही नहीं बरती जाएगी। पद रिक्त हैं उस बारे में उच्चाधिकारियों को लिखा जाएगा। असिस्टेंट जेलर के बीमारी के कारण अवकाश पर जाने से मुख्य प्रहरी को चार्ज सौंपा गया है। सुरक्षा के उपायों को बढ़ाने के लिए प्रस्ताव बना कर भेजे जाएंगे। सुरक्षा के पूरे इंतजाम किए जाएंगे। सब जेल की सुरक्षा को लेकर प्रशासन गंभीर है। भगवतीप्रसाद कलाल, उपखंडअधिकारी, ब्यावर

सब जेल फाइल फोटो