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एकेएच में दमा की जीवन रक्षक दवाओं का टोटा
राजकीयअमृतकौर अस्पताल में लंबे समय से अस्थमा के मरीजों को लगने वाले जीवन रक्षक इंजेक्शन का स्टॉक नहीं है। जिस कारण मरीजों को उसका सब्टीट्यूट लगाया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार सब्टीट्यूट के वे परिणाम नहीं है, जो उस इंजेक्शन के हैं, साथ ही उसके साइड इफेक्ट भी हैं। जिससे मरीजों को सब्टीट्यूट के दुष्परिणाम भी भुगतने पड़ सकते हैं।
अमिनोफाइलिन के स्थान पर डैरी फाइलिन
दरअसलअस्थमा के मरीजों को सांस लेने में परेशानी होने पर अमिनोफाइलिन इंजेक्शन लगाया जाता है। मरीजों को ग्लूकोज ड्रिप में 10 एमएल अमिनो फाइलिन इंजेक्शन लगाया जाता है। अस्पताल में लंबे समय से अमिनो फाइलिन खत्म होने के कारण उसका सब्टीट्यूट डैरीफाइलिन लगाया जा रहा है। ये मात्र 2 एमएल लगाया जाता है।
मरीजोंके हाथ पैरों में होने लगता है कंपन
विशेषज्ञने बताया कि अमिनोफाइलिन इंजेक्शन प्रारंभिक डॉज होती है। लेकिन उसके स्टॉक में नहीं होने के कारण डैरी फाइलिन लगाया जा रहा है। जो फास्ट इफैक्ट के लिए है और गंभीर मरीजों को लगाए जाते हैं। डैरी फाइलिन के तेजी से शरीर में जाने से मरीज को हाथ पैरों में कंपन की शिकायत सामने रही है।
भामाशाहने किए थे दान
अस्पतालमें तीन महीने पहले अमीनोफाइलिन का स्टॉक खत्म होने पर एक भामाशाह ने मरीजों की परेशानी को देखते हुए 1 हजार इंजेक्शन अस्पताल प्रबंधन को दान किए। उस स्टॉक को खत्म हुए भी दो महीने से ज्यादा बीत चुके हैं। लेकिन अजमेर सेंटर स्टोर में भी स्टॉक खत्म होने के कारण वहां से भी सप्लाई नहीं हो रहे हैं। जिससे अस्थमा के मरीजों को परेशानी उठाना पड़ रही है।
क्वालिटीटेस्ट होना बाकी
^स्टॉक खत्म होने के कारण सप्लाई नहीं की जा रही थी। हाल में अमिनो फाइलिन इंजेक्शन जिला औषधि भंडार में उपलब्ध हो गए हैं। अभी उनकी क्वालिटी टेस्ट होना बाकी है। जैसे ही इस कंपनी के इंजेक्शन क्वालिटी टेस्ट पास कर लेते हैं। ब्यावर अमृतकौर अस्पताल को प्राथमिकता से अमीनोफाइलिन इंजेक्शन पहुंचाए जाएंगे। डॉ.मोहित देवल, डीपीसी,अजमेर