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आदर्शों पर चलना भी जरूरी

5 वर्ष पहले
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ब्यावर| आर्यिकागणिनी विज्ञाश्री माताजी ने गर्भ कल्याणक महोत्सव का महत्व बताते हुए कहा कि गर्भ का आशय है गुप्त साधना करना जो गुप्त साधना गुप्त दान आदि करता है उसे गुप्त संपति प्राप्त होती है। माता मरुदेवी ने पूर्व भव में गुप्त साधना की तभी उन्हें महान पुत्र र| की प्राप्ति हुई। बालक गर्भ में रहता है तभी से वह माता-पिता के संस्कारों को ग्रहण करता है। आदर्शों में आस्था रखने मात्र से काम नहीं चलता आदर्शों पर चलना भी जरूरी है। माताजी ने कहा कि एक ओर तो जीव का गर्भ कल्याणक मनाते हैं। लेकिन यहीं गर्भपात जैसे जघन्य निकृष्ट पाप भी हो रहे हैं। गैरों की बेटी पर जान देते हो और स्वयं की बेटी की जान लेते हो। यह कहां का न्याय है। पंच कल्याणक महोत्सव में प्रतिमा की प्रतिष्ठा कराकर अपने हृदय में श्रद्धा अहिंसा की प्रतिष्ठा जरूर कर लेना तो आपका पंच कल्याणक मनाना सार्थक हो जाएगा। जिस देश में गर्भ कल्याणक महोत्सव मनाया जाता है उस देश में गर्भपात नहीं होना चाहिए। इसी प्रकार मुनि विश्रुत सागर ने भी कहा कि गर्भ में आते ही जीव का जन्म प्रारंभ हो जाता है।

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