पक्की सड़क मिले तो 55 गांव-ढाणियों को राहत
रिसर्जेंटराजस्थान के तहत प्रदेश सरकार भले ही टॉडगढ़ को पर्यटक दृष्टि से महत्व देने की बात कर रही है लेकिन इतिहास में अपने विशेष स्थान रखने वाला टॉडगढ़ प्रशासन के उपेक्षित रवैये के कारण प्रकृति की गोद में बसा होने के बावजूद शाम 6 बजने के साथ ही दुनिया से दूर हो जाता है।
पर्यटन के नक्शे में पहचान बनाने में जुटे टॉडगढ़ की विडंबना है कि यहां पर शाम को छह बजे के बाद आवागमन का कोई साधन नहीं है। राष्ट्रीय राजमार्ग 8 से टॉडगढ़ जाने तक 6 किमी का रास्ता जंगली पहाडिय़ों के बीच से होकर गुजरता है। जहां पर हिंसक जानवरों का हमेशा भय रहता है। ऐसे में इस रास्ते से होकर पैदल जाना ना केवल जोखिमभरा हो सकता है बल्कि कई बार निजी वाहनों के सामने भी हिंसक जानवर खड़े हो जाते हैं।
ऐसे में ऐसे में शाम के समय यहां आने वालों से सामने आवागमन के साधन की कमी खलती है। राष्ट्रीय राजमार्ग से जो रास्ता टॉडगढ़ जाता है वो भी पथरीला कच्चा है। यदि 8 किमी के इस रास्ते में में पक्की सड़क का निर्माण हो जाए तो यहां से जुड़े 55 गांव-ढाणियों को ना केवल राहत मिलेगी बल्कि विकास के भी नए आयाम तय हो सकेंगे।
तोआवागमन से छुटकारा
टॉडगढ़एक बड़ी समस्या से जूझ रहा है। जैसे ही टॉडगढ़ शाम के समय अंधेरे के आगोश में जाता है। लोगों के आवागमन के साधनों का संपर्क टूट जाता है। हालत यह है कि शाम छह बजे के बाद टॉडगढ़ का यह हाल है कि लोगों को भीम, देवगढ़ के साधन भी नहीं मिलते हैं। यदि टॉडगढ़ से पाली, जोधपुर जिलों से सीधा संपर्क हो जाए तो लोगों को इससे राहत मिलेगी। इसके अलावा टॉडगढ़ से वाया मालातों की वैर से दूधालेश्वर होते हुए सारन, सिरयारी होते हुए मारवाड़ जंक्शन से जोड़ा जाए। इस जुड़ाव से लोगों को पाली मारवाड़ के लिए कामलीघाट भीम के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। यह जुड़ाव होने से आवागमन के साधनों में काफी हद तक छुटकारा मिल सकता है।
सीधाभीलवाड़ा जोड़ा जाए
मारवाड़जंक्शन के पास डिंगोर की प्याऊ से जामुड़ा की नाल से दुधालेश्वर महादेव, मालातों की बेर, टॉडगढ़ से होते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग 8 से जोड़ा जा सकता है। राजमार्ग 8 से भीलवाड़ा के लिए पर्याप्त साधन हैं। प्रदेश सरकार ने भले ही टॉडगढ़ के उपतहसील से तहसील तहसील से उपखंड बना दिया हो लेकिन टॉडगढ़ को आवागमन के साधनों जैसी जटिल समस्या से जूझना पड़ रहा है। अतिरिक्तखर्च बचेगा इससड़क से टॉडगढ़ का संपर्क जुड़ जाए तो पाली जोधपुर के जाने के लिए भीम कामलीघाट के चक्कर से बचा जा सकता है। इसके अलावा लोगों का अतिरिक्त खर्च भी बचेगा।
रेखा कंवर, सरपंच टॉडगढ़
ब्यावर. जंगलों से गुजरता 6 किलोमीटर रास्ता अगर पक्का हो तो सुधरे हालात।