आज 106 साल का हो जाएगा टाउनहॉल
नगरपरिषद का टाउनहॉल रविवार को 106 साल का हो जाएगा। ब्यावर मेरवाड़ा स्टेट के संस्थापक कर्नल डिक्सन ने अपने काल में मेरवाड़ा नया शहर के नाम से दीवानी एवं फौजदारी व्यवस्था बनाये रखी। जो वर्ष 1836 से 1857 तक कायम रही। इस दौरान उन्होंने ब्यावर के निवासियों को जमीन के पट्टे नया नगर के नाम से आवंटित किए। तब ईस्ट इंडिया कंपनी की सल्तनत लागू थी।
ब्रिटिश सरकार ने मेरवाड़ा स्टेट को बरकरार रखते हुए इसके मुख्यालय नया नगर का नाम करण ब्यावर रखते हुए 1 मई सन् 1867 ई$ राजपूताना में सबसे पहिली म्युनिसिपैल्टी (स्थानीय प्रशासनिक संस्था) कायम की। यह संस्था भी उसी स्थान पर ही काम करने लगी जहां पर पहले डिक्सन के जमाने में कार्यालय था। यह कार्यालय वर्तमान में लोढ़ा मार्केट लोहिया बाजार वाला नोहरा था।
हालांकि ब्यावर म्युनिसिपल की स्थापना को 1 मई को 149 वर्ष पूरे हो जायेंगे। ब्रिटिश सरकार ब्यावर अंग्रेजी रियासत के कमिश्नर की नियुक्ति स्वयं करती थी। उनके सारे प्रशासनिक, न्यायिक, संचार, रेल सेवा, शिक्षा, चिकित्सा, सामाजिक, राजनैतिक, आर्थिक, धार्मिक, सुरक्षा राजस्व इत्यादि सारे कार्य मेरवाडा ब्यावर के नाम से आरंभ से लेकर हो रहे थे जब तक यह व्यवस्था 31 अक्टूबर 1956 तक मेरवाड़ा राज्य की ब्यावर में लागू रही थी।
इतिहासकार वासुदेव मंगल ने बताया कि सोची समझी चाल के तहत् राजस्थान की तत्कालीन सरकार ने मेरवाड़ा राज्य का नामोनिशान मिटाने के गरज से इस मेरवाड़ा राज्य की सारी व्यवस्था राजस्थान राज्य में 1 नवंबर 1956 को मिलाते वक्त राज्य को क्रम अवनत करते हुए जिला बनाकर मेरवाड़ा स्टेट को उपखंड बना दिया।
वर्तमान में टाउन हॉल की आधारशिला तत्कालिन अजमेर मेरवाड़ा के चीफ कमिश्नर मिस्टर ईजी कोल्विन ने रखी। यह ईमारत स्काटलैंड के एडिनबरा के टाऊन हाल का हूबहू नायाब नमूना है जो बड़ी खुबसूरत और भव्य आकर्षक है।
सन् 1911 में ब्रिटेन क्राउन ने भारत की राजधानी कलकत्ता की जगह दिल्ली बनाई जिसमें पंचम जार्ज द्वारा दरबार लगाया गया। सम्राट पंचम जॉर्ज की शोभा यात्रा हाथी पर चांदी के आेहदे पर जब चांदनी चौक दिल्ली से निकल रही थी उसी समय प्रतापसिंह बारहठ ने एक बिल्डिंग की छत से पंचम जॉर्ज पर बम फेंका। लकिन पंचम जार्ज बच गए।
इतिहासकार मंगल के मुताबिक सबसे पहले मेरवाड़ा अंग्रेजी रियासत (स्टेट) ब्यावर के लिए हिन्दू कमिश्नर बृजजीवनलाल चतुर्तेदी मथुरा वालें की नियुक्ति की गई।
बृजजीवनलाल 1911 से इस नई इमारत काल्विन हाल में बैठने लगे। ये दसवें सभापति प्रशासक थे जो अब 86वें नंबर की अध्यक्ष बबिता चौहान (सभापति) हैं। इस इमारत को 14 फरवरी 2016 को आज 106 साल पूरे हो चुके हैं।
अब तक 77 सभापति (प्रशासक) इस इमारत से ब्यावर का स्वायत शासन चला चुके है। ब्यावर में ही राजपूताना गजेटियर छपता था जो लीथो स्याही में छापा जाता था। यह अंग्रेजी शासन की व्यवस्था थी। इस इमारत (परिसर) में सन् 1902 से लेकर अभी तक 89 आयुक्त (कमिश्नर) ब्यावर स्वायत्त प्रशासन की देख रेख कर चुकें है।
इस परिसर में डब्लु टी रोबिन्स 1901-1902 में प्रथम आयुक्त थे जो सन् 1917-18 तक इस पद पर कार्यरत रहे। वर्तमान में मुरारीलाल वर्मा आरएएस 89वें नंबर के आयुक्त कार्यरत है। भारत स्वतन्त्र होने के बाद इस परिसर का नाम काल्विन हॉल की जगह इस कार्यालय का नाम नेहरू भवन रख दिया गया। आज भी यह नेहरू भवन के नाम से ही जाना जाता है। ब्यावर नगर परिषद के वर्तमान बोर्ड से लेखक की मांग है कि 21 फरवरी सन् 2006 के शहर का नाम नया नगर से ब्यावर नाम करनेे के लिए राजस्थान की राज्य सरकार को जो सर्व सम्मति से तत्कालिन बोर्ड द्वारा प्रस्ताव पारित कर भेेजा गया था उसको तुरंत प्रभाव से राज्य सरकार राजस्थान गजट में अधिसूचित करें इस आशय का पत्र जोर देकर भेजें। नहीं तो तुरंत प्रभाव से बोर्ड ब्यावर को जिला बनाये जाने के हित में यह प्रस्ताव पुन: पारित कर राज्य सरकार को बोर्ड की आपतकालीन बैठक के जरिये भेजे।
ब्यावर. नगर परिषद नेहरू भवन जो पहले कभी टाउन हॉल कहलाती थी।
ब्यावर. परिषद में लगा पत्थर।
इतिहासकार वासुदेव मंगल।